लखनऊ में दो सप्ताह बाद गोमती नदी का जलस्तर घटना शुरू, निचले इलाकों में जलभराव से राहत के लिए जलनिकासी तेज

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लखनऊ में दो सप्ताह बाद गोमती नदी का जलस्तर घटना शुरू, निचले इलाकों में जलभराव से राहत के लिए जलनिकासी तेज - AI Featured Image

लखनऊ में दो सप्ताह बाद गोमती नदी का जलस्तर घटना शुरू, निचले इलाकों में जलभराव से राहत के लिए जलनिकासी तेज

**गोमती नदी के जलस्तर में गिरावट और वर्तमान स्थिति**

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पिछले लगभग दो सप्ताह से उफान पर चल रही गोमती नदी के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है। नदी के उपरी और मध्य जलग्रहण क्षेत्रों में जलस्तर कम होने से बाढ़ और गंभीर जलभराव से जूझ रहे रिहायशी इलाकों के लिए राहत की शुरुआत हुई है। सिंचाई विभाग के अनुसार, जलस्तर चेतावनी बिंदु से नीचे आ रहा है, हालांकि नदी का जलस्तर सुरक्षित सीमा तक पूरी तरह पहुंचने में कुछ और दिनों का समय लग सकता है।

**जलस्तर के आधिकारिक आँकड़े और प्रमुख निगरानी केंद्र**

सिंचाई विभाग द्वारा दर्ज किए गए आंकड़ों के अनुसार, नदी के विभिन्न जल-मापक केंद्रों पर लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। भातपुरवा केंद्र पर 24 घंटों के भीतर जलस्तर में लगभग 13 सेंटीमीटर की कमी आई और यह घटकर 112.64 मीटर पर आ गया। इसी प्रकार गौघाट पर जलस्तर घटकर 108.48 मीटर, हनुमान सेतु पर 107.19 मीटर तथा गोमती बैराज पर 106.96 मीटर दर्ज किया गया। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, गोमती बैराज के सभी गेट तब तक खुले रखे जाएंगे जब तक नदी का जलस्तर निर्धारित सुरक्षित सीमा (105.60 मीटर) से नीचे नहीं आ जाता। वर्तमान में बैराज पर पानी इस सीमा से ऊपर बह रहा है।

**प्रभावित क्षेत्र और आम जनजीवन पर असर**

जलस्तर घटने के बावजूद निचले और तटवर्ती मोहल्लों में भारी मात्रा में पानी जमा है। उत्तरी लखनऊ के फैजुल्लागंज, मल्लाही टोला, दाउद नगर, ममा कॉलोनी और मिल्लत नगर जैसे घनी आबादी वाले इलाके सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। इन इलाकों के हजारों घरों में भूतल तक पानी भर जाने से घरेलू सामान, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और राशन सामग्री को भारी नुकसान पहुँचा है। स्थानीय निवासियों को आवागमन के लिए नावों और वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा है। इसके अतिरिक्त शहीद पथ के सर्विस लेन, इकाना स्टेडियम के आसपास और गोमती नगर विस्तार के निचले हिस्सों में भी पानी भर गया था, जहाँ से पानी धीरे-धीरे निकल रहा है।

**जलभराव की पृष्ठभूमि और कारण**

पीलीभीत और लखीमपुर खीरी सहित ऊपरी कैचमेंट क्षेत्रों में हुई भारी वर्षा और तेज बहाव के कारण लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया था। तकनीकी विशेषज्ञों और सिंचाई विभाग के अधिकारियों का आकलन है कि नदी के प्राकृतिक डूब क्षेत्रों (फ्लडप्लेन्स) में हुए निर्माण कार्य और जल निकासी के प्राकृतिक नालों के अवरुद्ध होने के कारण पानी की निकासी की गति धीमी हो गई है, जिससे रिहायशी बस्तियों में पानी लंबे समय तक रुका हुआ है।

**प्रशासनिक कदम और बुनियादी ढाँचे के लिए आगे की योजना**

नगर निगम और स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रभावित बस्तियों में जलनिकासी के लिए भारी क्षमता वाले पंप लगाए गए हैं। जलजनित रोगों की रोकथाम के लिए फॉगिंग, चूने और ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव के साथ-साथ चिकित्सा दल भी तैनात किए गए हैं। भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सिंचाई विभाग ने फैजुल्लागंज से नैमिषारण्य तक प्रस्तावित नए तटबंध निर्माण के लिए भूमि सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की है।

**नागरिकों के लिए उपयोगी जानकारी व सावधानियां**

बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही संक्रामक और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को केवल उबला हुआ या क्लोरीनयुक्त पानी पीने, खुले खाद्य पदार्थों से बचने और घरों में बिजली बहाल करने से पहले वायरिंग व उपकरणों की तकनीकी जांच कराने की सलाह दी है। जलभराव वाले गंदे पानी के संपर्क से बचने और किसी भी प्रकार के बुखार या संक्रमण के लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य शिविर या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने को कहा गया है।

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