असम की सीमा में पहुंची बक्सा टाइगर रिजर्व की बाघिन को सुरक्षित वापस लाने की तैयारी में जुटा पश्चिम बंगाल वन विभाग
असम की सीमा में पहुंची बक्सा टाइगर रिजर्व की बाघिन को सुरक्षित वापस लाने की तैयारी में जुटा पश्चिम बंगाल वन विभाग
पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में स्थित बक्सा टाइगर रिजर्व (बीटीआर) से भटककर असम के रायमोना राष्ट्रीय उद्यान में पहुंची तीन वर्षीय बाघिन को सुरक्षित वापस लाने के लिए राज्य सरकार ने कदम उठाए हैं। पश्चिम बंगाल के वन मंत्री मनोज कुमार उरांव ने असम के कोकराझार जिले का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद के वन प्रतिनिधियों व अधिकारियों के साथ बैठक कर बाघिन को वापस बीटीआर स्थानांतरित करने की रूपरेखा तैयार की।
इस बाघिन (पहचान BTR-TF-1 / टी-138) को पश्चिम बंगाल के बाघ पुनर्वास एवं संवर्धन कार्यक्रम के तहत बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से बक्सा लाया गया था। हालांकि, उपयुक्त क्षेत्र और पर्यावास की तलाश में वह संकोश नदी पार करके असम के रायमोना राष्ट्रीय उद्यान की सीमा में दाखिल हो गई। रेडियो कॉलर के जरिए वन विभाग लगातार उसकी आवाजाही पर नजर रखे हुए है।
वन अधिकारियों के अनुसार, शुरुआत में बाघिन को अपने हिसाब से पर्यावास चुनने की अनुमति दी गई थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों में वह पार्क के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित मानव बस्तियों (जैसे बोरागुड़ी और हातीगढ़ गांव) के नजदीक आ गई। इसके अलावा, काली पूजा व त्योहारों के दौरान पटाखों की आवाज से जानवर के विचलित होने और संभावित मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका को देखते हुए वन विभाग ने इसे ट्रैंक्विलाइज (बेहोश) कर या पिंजरे के जरिए पकड़ने का निर्णय लिया है।
इस अभियान के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) से आवश्यक मंजूरी मांगी गई है। अभियान में पश्चिम बंगाल और असम के वन विभागों के अलावा भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) तथा सुरक्षा बलों की टीमें भी निगरानी और बचाव कार्य में सहयोग कर रही हैं, ताकि ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए बाघिन को बिना किसी नुकसान के उसके मूल पर्यावास में वापस लाया जा सके।
