उत्तर प्रदेश में दोबारा सत्ता में आने पर लागू होगी समान नागरिक संहिता, लखनऊ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा
उत्तर प्रदेश में दोबारा सत्ता में आने पर लागू होगी समान नागरिक संहिता, लखनऊ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के सभागार में 30 अक्टूबर 2026 को आयोजित भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बड़ा राजनीतिक व नीतिगत संकल्प प्रस्तुत किया। उन्होंने घोषणा की कि यदि राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी पुनः सरकार बनाती है, तो उत्तर प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि देश के कई राज्य इस दिशा में पहले ही कदम उठा चुके हैं और उत्तर प्रदेश में नई सरकार के गठन के साथ ही इसे धरातल पर उतारा जाएगा।
इस एकदिवसीय प्रदेश कार्यसमिति बैठक की अध्यक्षता प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने की। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े तथा राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। बैठक का प्राथमिक उद्देश्य राज्य में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना और आगामी विधानसभा चुनावों की दिशा तय करना था।
अपने संबोधन के दौरान गृह मंत्री ने राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में सरकार पूरी दृढ़ता से स्थापित है। इसके साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों पर तीखे राजनीतिक हमले बोले और संसद में चुनावी मुद्दों पर बहस की चुनौती दी। नीतिगत पृष्ठभूमि के तहत समान नागरिक संहिता सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में एक समान कानून का प्रावधान करती है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 44 में नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत रेखांकित किया गया है।
इस घोषणा का राज्य की राजनीति और जनसामान्य पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है। चुनावी वर्ष से पूर्व यूसीसी को प्रमुख एजेंडे के रूप में पेश करने से राज्य के राजनीतिक विमर्श में वैचारिक मुद्दे केंद्र में आ गए हैं। इस निर्णय से जहां सत्ताधारी दल अपने कैडर और मतदाताओं को वैचारिक आधार पर एकजुट करने का प्रयास कर रहा है, वहीं विपक्षी दल इसे लेकर सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं, जिससे आगामी विधानसभा चुनाव का मुख्य नैरेटिव तय होने के संकेत मिल रहे हैं।
