बिहार से दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरी तरह विदाई, मौसम संक्रमण काल शुरू होने से सुबह-शाम ठंडक और दोपहर में उमस का असर
बिहार से दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरी तरह विदाई, मौसम संक्रमण काल शुरू होने से सुबह-शाम ठंडक और दोपहर में उमस का असर
मानसून की पूर्ण विदाई और वर्तमान स्थिति
बिहार से दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह वापस लौट गया है। मौसम विज्ञान केंद्र, पटना द्वारा जारी आधिकारिक पुष्टि के अनुसार, 12 अक्टूबर को मानसून की राज्य से पूर्ण विदाई दर्ज की गई। राज्य में मानसून वापसी की प्रक्रिया 3 अक्टूबर से शुरू हुई थी और शुरुआती चरण में ही यह लगभग 80 प्रतिशत भूभाग से विदा हो चुका था। इसके बाद मानसून की विदाई रेखा कुछ दिनों तक सुपौल के समीप स्थिर रही और अंततः 12 अक्टूबर को राज्य के सभी हिस्सों से इसकी वापसी संपन्न हुई।
आधिकारिक आँकड़े और वर्षा का रिकॉर्ड
मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष मानसून की विदाई प्रक्रिया पिछले एक दशक में सबसे पहले शुरू हुई, यद्यपि इसकी संपूर्ण वापसी सामान्य समय सीमा के आसपास ही पूरी हुई। इस पूरे मानसून सत्र के दौरान राज्य में सामान्य की तुलना में 32 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। हालिया तापमान के आंकड़ों के अनुसार, विदाई के तुरंत बाद राज्य के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास बना रहा, जिसमें भभुआ 36.9 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म स्थान दर्ज किया गया, जबकि पटना में अधिकतम तापमान सामान्य से लगभग 1.8 डिग्री नीचे रहा।
मौसम संक्रमण काल की शुरुआत
मौसम वैज्ञानिकों ने बताया है कि मानसून की विदाई के बाद अगले 15 दिनों तक राज्य 'मौसम संक्रमण काल' (ट्रांजिशन फेज) में रहेगा। इस अवधि के दौरान सुबह और देर शाम के समय हल्की गुलाबी ठंडक का एहसास होगा, जबकि दोपहर के समय धूप खिलने पर उमस भरी गर्मी रह सकती है। दिन के समय बादलों की आवाजाही के आधार पर तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा।
आगामी पूर्वानुमान और बदलाव की संभावना
मौसम विभाग के आगामी सप्ताह के पूर्वानुमान के अनुसार, 16 और 17 अक्टूबर के बाद राज्य के अधिकतम और न्यूनतम तापमान में लगभग 2 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी में बनने वाली मौसमी प्रणालियों के असर से 16 से 18 अक्टूबर के दौरान कुछ इलाकों में आंशिक रूप से बादल छाए रहने तथा छिटपुट हल्की वर्षा या बूंदाबांदी की संभावना भी जताई गई है।
आम नागरिकों और किसानों के लिए उपयोगी जानकारी
मौसम में आ रहे इस बदलाव के मद्देनजर स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। दिन में तेज धूप और रात में गिरते पारे के कारण तापमान में आने वाला यह अंतर मौसमी बीमारियों (जैसे सर्दी, जुकाम और वायरल संक्रमण) का कारण बन सकता है, इसलिए विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को सुबह-शाम अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। वहीं, ग्रामीण और नदी तटीय क्षेत्रों में सुबह के समय हल्की धुंध का प्रभाव देखा जा सकता है। किसानों के लिए यह अवधि खरीफ फसलों की कटाई और आगामी रबी सत्र की तैयारियों के अनुकूल रहने का अनुमान है।
