हरियाणा कैबिनेट का बड़ा फैसला: पूर्व अग्निवीरों को ग्रुप-सी भर्तियों में परीक्षा से छूट, लाडो लक्ष्मी योजना का दायरा भी बढ़ा
हरियाणा कैबिनेट का बड़ा फैसला: पूर्व अग्निवीरों को ग्रुप-सी भर्तियों में परीक्षा से छूट, लाडो लक्ष्मी योजना का दायरा भी बढ़ा
हरियाणा सरकार ने राज्य में पूर्व अग्निवीरों के रोजगार को सुगम बनाने और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार करने के उद्देश्य से कई बड़े नीतिगत फैसलों को मंजूरी दी है। चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में संशोधित अग्निवीर नीति और 'दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना' में संशोधनों पर मुहर लगाई गई।
स्वीकृत नीति के तहत राज्य सरकार के विभागों में नीति के दायरे में आने वाले ग्रुप-सी पदों पर पूर्व अग्निवीरों को निर्धारित भर्ती परीक्षाओं से पूरी तरह छूट दी जाएगी। इसके तहत विज्ञापित पदों पर आरक्षण और अन्य लागू नियमों के अनुसार उनकी सीधी नियुक्ति पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा, पर्यावरण व वन विभाग में वाइल्डलाइफ गार्ड, इंडियन रिजर्व बटालियन (आईआरबी) में कांस्टेबल, राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) में कांस्टेबल तथा राजस्व व आपदा प्रबंधन विभाग में फायर ऑपरेटर-कम-ड्राइवर के पदों के लिए पूर्व अग्निवीरों को शारीरिक दक्षता परीक्षा (PST) और शारीरिक माप परीक्षण (PMT) से भी छूट प्रदान की गई है। साथ ही, खान एवं भूविज्ञान विभाग में 'माइनिंग गार्ड' के पद को ग्रुप-डी से ग्रुप-सी में अपग्रेड करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है ताकि पूर्व अग्निवीरों को निर्धारित आरक्षण का लाभ मिल सके।
मंत्रिमंडल ने 'दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना' की वार्षिक पारिवारिक आय पात्रता सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.80 लाख रुपये करने का निर्णय लिया है। इस फैसले से राज्य की लाखों अतिरिक्त पात्र महिलाओं को योजना का लाभ मिल सकेगा। इसके तहत कम सहायता राशि चुनने के प्रावधान को हटाकर सभी पात्र लाभार्थियों को 2,100 रुपये प्रति माह की तय राशि सीधे बैंक खाते में दी जाएगी।
इसके साथ ही, राज्य सरकार ने पात्र मीडियाकर्मियों के लिए अधिकतम वित्तीय सहायता सीमा को 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है। इसके अलावा, ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों को धन हस्तांतरण के लिए सातवें वित्त आयोग की रिपोर्ट आने तक छठे राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों को ही 2026-27 के लिए जारी रखने की स्वीकृति दी गई है, जिसके तहत राज्य के स्वयं के कर राजस्व का 7 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय निकायों को दिया जाएगा।
