अल्बुकर्क के रॉबिन्सन पार्क में समय पाबंदियों के खिलाफ बेघर नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का ‘राइट टू रेस्ट’ प्रदर्शन

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अल्बुकर्क के रॉबिन्सन पार्क में समय पाबंदियों के खिलाफ बेघर नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का 'राइट टू रेस्ट' प्रदर्शन - AI Featured Image

अल्बुकर्क के रॉबिन्सन पार्क में समय पाबंदियों के खिलाफ बेघर नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का 'राइट टू रेस्ट' प्रदर्शन

न्यू मैक्सिको के शहर अल्बुकर्क में नगर प्रशासन द्वारा सार्वजनिक पार्क के समय में किए गए बदलावों को लेकर विवाद सामने आया है। अल्बुकर्क के डाउनटाउन स्थित रॉबिन्सन पार्क (Robinson Park) में दर्जनों बेघर लोगों और उनके अधिकारों के लिए सक्रिय कार्यकर्ताओं ने नगर निगम के नए नियमों की अवहेलना करते हुए 'राइट टू रेस्ट' धरने का आयोजन किया। प्रदर्शनकारी पार्क के आधिकारिक रूप से बंद रहने के घंटों के दौरान भी वहां डटे रहे और शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया।

यह विरोध प्रदर्शन 'अल्बुकर्क होमलेस यूनियन' की अगुवाई में आयोजित किया गया था। नगर प्रशासन ने हाल ही में रॉबिन्सन पार्क के संचालन समय में फेरबदल करते हुए दिन के कुछ हिस्सों (सुबह और दोपहर के कुछ घंटों) में पार्क को बंद रखने के नियम लागू किए हैं। मेयर कार्यालय और नगर अधिकारियों के अनुसार, इन पाबंदियों का उद्देश्य पार्क की अत्यधिक खपत के बाद रख-रखाव करना, कचरा हटाना, नशीले पदार्थों से जुड़ी गतिविधियों को रोकना तथा जरूरतमंदों को सामाजिक सहायता सेवाओं से जोड़ना है।

प्रदर्शनकारियों और नागरिक अधिकार समर्थकों ने आरोप लगाया है कि दिन के समय पार्क बंद करने के यह असामान्य नियम विशेष रूप से बेघर आबादी को सार्वजनिक स्थलों से हटाने और उन्हें परेशान करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक कोई व्यक्ति कानून का उल्लंघन नहीं कर रहा है, तब तक उसे सार्वजनिक पार्क में बैठने और आराम करने का बुनियादी अधिकार होना चाहिए। धरने के दौरान आयोजकों ने जरूरतमंदों के लिए कपड़े और जरूरी सामान भी एकत्र किए, जबकि पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान हस्तक्षेप या गिरफ्तारी नहीं की।

यह मामला अल्बुकर्क में सार्वजनिक संपत्तियों के प्रबंधन, कानून-व्यवस्था और बेघर आबादी के बुनियादी अधिकारों के बीच लंबे समय से चल रही बहस को उजागर करता है। जहां एक ओर स्थानीय व्यापारी और कुछ निवासी पार्कों में सुरक्षा व स्वच्छता सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि पर्याप्त आश्रय और स्थायी आवास समाधान उपलब्ध कराए बिना सार्वजनिक स्थानों पर ऐसी पाबंदियां लगाना मानवीय दृष्टिकोण के खिलाफ है।

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