महाराष्ट्र में MPSC पेपर लीक और अनियमितताओं की जांच हेतु उच्चस्तरीय समिति गठित, आईएएस तुकाराम मुंढे बने सचिव; चेयरमैन छुट्टी पर गए

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महाराष्ट्र में MPSC पेपर लीक और अनियमितताओं की जांच हेतु उच्चस्तरीय समिति गठित, आईएएस तुकाराम मुंढे बने सचिव; चेयरमैन छुट्टी पर गए - AI Featured Image

महाराष्ट्र में MPSC पेपर लीक और अनियमितताओं की जांच हेतु उच्चस्तरीय समिति गठित, आईएएस तुकाराम मुंढे बने सचिव; चेयरमैन छुट्टी पर गए

महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति में राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश दिलीप भोसले को जांच समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति के अन्य सदस्यों में आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी गौतम, पूर्व आईएएस अधिकारी गणेश पाटिल और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी. डी. नाइक शामिल हैं। समिति को अपनी जांच पूरी कर 60 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

जांच समिति के गठन की घोषणा के बाद, नैतिक आधार का हवाला देते हुए MPSC के वर्तमान अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने का निर्णय लिया। सरकार के इस कदम के बाद पुणे के एस.एम. जोशी पुल पर पिछले दस दिनों से अनशन और प्रदर्शन कर रहे प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों ने अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की। राज्य के मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर छात्रों से मुलाकात की और सरकारी निर्णय से अवगत कराया।

यह पूरा विवाद मुख्य रूप से मार्च में आयोजित ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के कथित पेपर लीक और आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी के आरोपों के बाद गहराया था। अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में पेपर लीक प्रकरण की न्यायिक जांच, MPSC नेतृत्व की जवाबदेही तय करना, आगामी तीन वर्षों में रिक्त 70,000 पदों पर चरणबद्ध भर्ती, ग्रुप-सी परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाना और आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेना शामिल था।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए इस उच्चस्तरीय समिति का गठन और सख्त प्रशासनिक छवि वाले अधिकारी की नियुक्ति एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इससे चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बहाल होने, निष्पक्ष जांच सुनिश्चित किए जाने और भविष्य में सरकारी भर्तियों के समयबद्ध संचालन की उम्मीद जगी है। इसके साथ ही तुकाराम मुंढे ने यह भी स्पष्ट किया कि वे एफडीए आयुक्त का अपना कार्यभार भी पूर्ववत संभालते रहेंगे।

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