महाराष्ट्र में एमपीएससी पेपर लीक विवाद के बीच जांच समिति गठित, अध्यक्ष छुट्टी पर गए और छात्रों ने समाप्त किया आंदोलन

0
महाराष्ट्र में एमपीएससी पेपर लीक विवाद के बीच जांच समिति गठित, अध्यक्ष छुट्टी पर गए और छात्रों ने समाप्त किया आंदोलन - AI Featured Image

महाराष्ट्र में एमपीएससी पेपर लीक विवाद के बीच जांच समिति गठित, अध्यक्ष छुट्टी पर गए और छात्रों ने समाप्त किया आंदोलन

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों को लेकर पुणे के एस. एम. जोशी पुल पर चल रहा अभ्यर्थियों का 10-11 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन समाप्त हो गया है। राज्य सरकार द्वारा प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने और एक उच्च स्तरीय पांच सदस्यीय जांच समिति के गठन की घोषणा के बाद यह आंदोलन वापस लिया गया।

राज्य सरकार द्वारा गठित इस समिति की अध्यक्षता बॉम्बे और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश दिलीप भोसले करेंगे। वहीं, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तथा राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) आयुक्त तुकाराम मुंढे को इस समिति का सचिव नियुक्त किया गया है। समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी. डी. नाईक, पूर्व आईएएस अधिकारी गणेश पाटिल और पुलिस महानिरीक्षक लक्ष्मी गौतम को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। इस समिति को पूरे मामले और आयोग की कार्यप्रणाली की पड़ताल कर 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट तथा सुधार संबंधी सिफारिशें सौंपने का निर्देश दिया गया है।

जांच समिति के गठन की घोषणा के तुरंत बाद एमपीसी के अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने जांच पूरी होने तक पद से छुट्टी पर जाने का फैसला किया। उन्होंने सार्वजनिक बयान जारी कर कहा कि वे हमेशा नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देते आए हैं, इसलिए जांच अवधि के दौरान पद से अवकाश पर रहेंगे। छात्र उनके इस्तीफे या हटाए जाने की मांग पर अड़े हुए थे।

यह विवाद मार्च में आयोजित ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के कथित पेपर लीक और सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र प्रसारित होने के आरोपों के बाद भड़का था। पुणे में छात्र प्रतिनिधि और विपक्षी विधायक लगातार आयोग की व्यवस्था में सुधार, पारदर्शी ऑफलाइन परीक्षाओं और रिक्त पदों पर भर्ती की मांग कर रहे थे। सरकार की ओर से मंत्री शिवेंद्र राजे भोसले ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर भरोसा दिलाया कि समिति की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज पुलिस मामले भी वापस लिए जाएंगे। इस फैसले से राज्य के लाखों प्रतियोगी परीक्षार्थियों को राहत मिलने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बहाल होने की उम्मीद जगी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed