झारखंड में 108 एंबुलेंस कर्मियों की 40 घंटे की हड़ताल शुरू, 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की चेतावनी

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झारखंड में 108 एंबुलेंस कर्मियों की 40 घंटे की हड़ताल शुरू, 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की चेतावनी - AI Featured Image

झारखंड में 108 एंबुलेंस कर्मियों की 40 घंटे की हड़ताल शुरू, 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की चेतावनी

झारखंड में 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के चालकों और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियनों (ईएमटी) ने लंबित वेतन भुगतान और सेवा सुरक्षा समेत कई मांगों को लेकर 40 घंटे की सांकेतिक हड़ताल शुरू कर दी है। झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ के आह्वान पर यह कार्यबंदी 15 अक्टूबर की रात 8 बजे से प्रभावी हुई, जो 17 अक्टूबर की सुबह 8 बजे तक जारी रखने की घोषणा की गई है। इस आंदोलन के तहत 16 अक्टूबर को सैकड़ों कर्मचारियों ने राजधानी रांची के नामकुम स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कार्यालय के समक्ष शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया।

कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें जुलाई महीने से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे उनके सामने गहरा आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। संघ की मुख्य मांगों में बकाया वेतन का तत्काल भुगतान, सेवा से हटाए गए अथवा बर्खास्त कर्मचारियों की पुनर्बहाली, न्यूनतम मजदूरी दर लागू करना तथा ईपीएफ और ईएसआई जैसी वैधानिक सुविधाएं देना शामिल है। इसके अतिरिक्त, कर्मचारी संघ मांग कर रहा है कि 108 एंबुलेंस का संचालन किसी निजी एजेंसी के बजाय जिला स्तर पर सिविल सर्जन के माध्यम से कराया जाए, मानदेय का सीधा भुगतान एनएचएम करे और कर्मियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष निर्धारित कर सेवा सुरक्षा दी जाए, ताकि एजेंसी बदलने पर कर्मियों को न हटाया जाए।

संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, 16 सितंबर को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के साथ हुई बैठक में समस्याओं के समाधान के लिए 15 से 20 दिनों का समय तय किया गया था, लेकिन समयसीमा बीत जाने के बाद भी कोई ठोस प्रशासनिक आदेश जारी नहीं हुआ। कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया, तो 21 अक्टूबर से पूरे राज्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।

इस हड़ताल के कारण राज्यभर के विभिन्न जिलों में आपातकालीन स्वास्थ्य परिवहन सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे गंभीर मरीजों, सड़क दुर्घटना पीड़ितों और गर्भवती महिलाओं को अस्पतालों तक पहुंचाने में आम नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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