कोलकाता के चोरबागान पूजा पंडाल भगदड़ मामले में पुलिस ने अदालत से मांगी दो आरोपियों के वॉयस सैंपल की अनुमति

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कोलकाता के चोरबागान पूजा पंडाल भगदड़ मामले में पुलिस ने अदालत से मांगी दो आरोपियों के वॉयस सैंपल की अनुमति - AI Featured Image

कोलकाता के चोरबागान पूजा पंडाल भगदड़ मामले में पुलिस ने अदालत से मांगी दो आरोपियों के वॉयस सैंपल की अनुमति

कोलकाता के उत्तरी इलाके में स्थित चोरबागान सर्बोजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में 17 अक्टूबर को हुई भीषण भगदड़ की जांच के सिलसिले में कोलकाता पुलिस ने एक स्थानीय अदालत से दो गिरफ्तार आरोपियों के वॉयस सैंपल (आवाज के नमूने) लेने की अनुमति मांगी है। पुलिस मामले में गिरफ्तार पूजा समिति के कोषाध्यक्ष संजीव राहा और उद्घोषक कुशल मजूमदार की आवाज का फॉरेंसिक मिलान उस ऑडियो रिकॉर्डिंग से कराना चाहती है, जिसमें की गई घोषणाओं से कथित तौर पर भीड़ में घबराहट फैली और भगदड़ की स्थिति बनी।

जांच अधिकारियों के अनुसार, घटना के समय की तीन से चार ऑडियो और वीडियो क्लिप जुटाई गई हैं। पुलिस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि लाउडस्पीकर पर की गई घोषणा किसकी आवाज में थी, ताकि घटनाक्रम की सटीक कड़ियां जोड़ी जा सकें। इस हादसे के सिलसिले में पुलिस अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें पूजा समिति के सचिव राज कुमार सेवड़ा, उपाध्यक्ष शांतनु दुबे और बांस के ढांचे का निर्माण करने वाला ठेकेदार बिप्लव मुखर्जी भी शामिल हैं।

यह हादसा 17 अक्टूबर की शाम भारी बारिश के दौरान अचानक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पंडाल में एकत्र होने और संकरे निकास मार्ग के कारण हुआ था। इस भगदड़ में 19 लोगों की जान चली गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, जबकि 25 अन्य घायल हो गए थे। घटना की गंभीरता को देखते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय के परामर्श से सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अनिंदिता रॉय सरस्वती की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है, जिसने साक्ष्य जुटाने के लिए पंडाल परिसर को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है।

इस त्रासदी के बाद कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान भीड़ नियंत्रण, निकास द्वारों की पर्याप्तता, एयर कंडीशनिंग व वेंटिलेशन प्रणाली और आपातकालीन घोषणाओं के प्रोटोकॉल को लेकर व्यापक सवाल उठे हैं तथा सुरक्षा नियमों की नए सिरे से समीक्षा की जा रही है।

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