उत्तर प्रदेश के डेयरी क्षेत्र में ₹695 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त, 2,500 से अधिक युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के अवसर
उत्तर प्रदेश के डेयरी क्षेत्र में ₹695 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त, 2,500 से अधिक युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के अवसर
क्या हुआ और कहाँ से आया प्रस्ताव
उत्तर प्रदेश के दुग्ध विकास विभाग को अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले (यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो) के दौरान डेयरी क्षेत्र में प्रसंस्करण, नई तकनीक और संयंत्र स्थापित करने के लिए कुल 695.18 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। राज्य सरकार के दुग्ध विकास विभाग के अनुसार, इन निवेश प्रस्तावों के धरातल पर उतरने से राज्य के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में 2,500 से अधिक युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
प्रमुख निवेश और कंपनियों का विवरण
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, विभिन्न निजी कंपनियों एवं उद्यमियों की ओर से कुल 22 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें सबसे बड़ा निवेश ‘ऐस इंटरनेशनल लिमिटेड’ की ओर से प्रस्तावित है, जो हाथरस, अलीगढ़ और आगरा में अत्याधुनिक डेयरी संयंत्र स्थापित करने के लिए 457 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस एकल परियोजना से ही करीब 1,500 युवाओं को रोजगार मिलने का अनुमान है।
इसके अलावा, ‘केयरब्रो इनोवेटर्स प्राइवेट लिमिटेड’ ने अयोध्या, लखनऊ, मेरठ और बरेली में संयंत्र व वितरण इकाइयां लगाने के लिए 100 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव दिया है, जिससे 250 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। अन्य प्रमुख प्रस्तावों में ‘अंजुम डेयरी’ द्वारा मुरादाबाद और रामपुर में इकाई स्थापित करने के लिए 50 करोड़ रुपये, ‘गौरी फूड एंड बेवरेजेस’ द्वारा 14.65 करोड़ रुपये तथा ‘के डेयरी फार्म’ द्वारा झांसी और लखनऊ में विस्तार के लिए 12 करोड़ रुपये के प्रस्ताव शामिल हैं।
आधिकारिक बयान और विभागीय भूमिका
उत्तर प्रदेश की दुग्ध आयुक्त (आईएएस) धनलक्ष्मी के. ने बताया कि व्यापार मेले के दौरान विभागीय स्टॉल पर निवेशकों, उद्यमियों और डेयरी किसानों के साथ विशेष तकनीकी सत्र और परिचर्चाएं आयोजित की गईं। इस दौरान निवेशकों को राज्य में उपलब्ध दुग्ध उत्पादन क्षमता, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन), कोल्ड-चेन नेटवर्क और तकनीकी आवश्यकताओं से अवगत कराया गया। गहन चर्चा और परियोजनाओं के तकनीकी मूल्यांकन के बाद 695.18 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया गया।
नीतिगत पृष्ठभूमि और ढाँचा
यह सभी निवेश प्रस्ताव ‘उत्तर प्रदेश दुग्ध विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022’ के तहत दिए गए प्रोत्साहनों और सुविधाओं के दायरे में आ रहे हैं। राज्य वर्तमान में देश के कुल दुग्ध उत्पादन में लगभग 16 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है। सरकार का उद्देश्य केवल कच्चे दूध के उत्पादन तक सीमित न रहकर पनीर, मक्खन, घी, फ्लेवर्ड मिल्क और पाउडर जैसे प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देना है, जिससे मूल्य संवर्धन हो सके और उत्पादों की बाजार पहुंच बढ़े।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
इन नए डेयरी संयंत्रों की स्थापना से स्थानीय पशुपालकों और ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों को सीधा लाभ पहुंचेगा। आधुनिक चिलिंग और प्रोसेसिंग प्लांट लगने से दूध खराब होने का जोखिम कम होगा और किसानों को उनके उत्पाद का उचित व स्थिर मूल्य सीधे मिल सकेगा। इससे दुग्ध सहकारी समितियों और स्थानीय दूध आपूर्ति शृंखला को मजबूती मिलेगी।
आगे की प्रक्रिया
दुग्ध विकास विभाग अब इन सभी 22 प्रस्तावों के लिए भूमि आवंटन समन्वय, विभिन्न विभागों से आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) और वित्तीय अनुदानों की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए कार्य कर रहा है, ताकि आगामी महीनों में इन संयंत्रों की स्थापना का कार्य जमीनी स्तर पर शुरू हो सके।


