छत्तीसगढ़ में लागू हुआ नया भाड़ा नियंत्रण कानून, राज्यपाल ने दी संशोधन विधेयक को मंजूरी
छत्तीसगढ़ में लागू हुआ नया भाड़ा नियंत्रण कानून, राज्यपाल ने दी संशोधन विधेयक को मंजूरी
छत्तीसगढ़ में मकान और दुकान किराए पर देने तथा लेने की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए नया भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) कानून लागू हो गया है। राज्यपाल रमेन डेका ने 'छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) अधिनियम' को अपनी औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी है, जिसके बाद यह कानून पूरे प्रदेश में प्रभावी हो गया है। इस कानून के अमल में आने से राज्य के सालाना 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के किराए के कारोबार को एक स्पष्ट कानूनी ढांचे के दायरे में लाया गया है।
नए कानून के तहत मकान मालिकों और किराएदारों के अधिकारों व दायित्वों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है ताकि आए दिन होने वाले विवादों पर लगाम लगाई जा सके। संशोधित प्रावधानों के अनुसार, मकान मालिक अब किसी भी किराएदार से अधिकतम तीन महीने के किराए के बराबर ही सुरक्षा निधि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) ले सकेंगे; इससे अधिक अग्रिम राशि की मांग करना गैर-कानूनी होगा। इसके साथ ही सालाना किराया वृद्धि की सीमा भी तय कर दी गई है—2,000 रुपये तक के मासिक किराए पर प्रति वर्ष अधिकतम 5 प्रतिशत और 2,000 रुपये से अधिक के किराए पर प्रति वर्ष अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही बढ़ोतरी की जा सकेगी।
अधिनियम में यह भी अनिवार्य किया गया है कि किराएदारी के लिए विधिवत लिखित अनुबंध (एग्रीमेंट) निष्पादित किया जाए और उसकी एक प्रति किराएदार को उपलब्ध कराई जाए। किराए के हर भुगतान पर रसीद देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, किसी भी विवाद की स्थिति में मकान मालिक मनमाने ढंग से किराएदार की बिजली-पानी जैसी आवश्यक सेवाएं बंद नहीं कर सकेंगे और न ही बिना विधिक प्रक्रिया के मकान खाली करा सकेंगे।
यह नया कानून आम नागरिकों, विशेषकर छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, छोटे व्यवसायियों और संपत्ति मालिकों को सीधे प्रभावित करेगा। इससे अनाप-शनाप किराया वृद्धि और मनमानी बेदखली से किराएदारों को सुरक्षा मिलेगी, वहीं समय पर किराया भुगतान और संपत्ति संरक्षण को लेकर मकान मालिकों के अधिकार भी सुरक्षित होंगे। विवादों के समाधान के लिए एक सुव्यवस्थित प्राधिकारी तंत्र की रूपरेखा तैयार की गई है, जिससे अदालती मुकदमों में कमी आने की उम्मीद है।
