काला सागर में बुल्गारियाई तट के पास दो व्यापारिक जहाजों पर ड्रोन हमला, एक पोत डूबा और 11 नाविक लापता
काला सागर में बुल्गारियाई तट के पास दो व्यापारिक जहाजों पर ड्रोन हमला, एक पोत डूबा और 11 नाविक लापता
काला सागर में बुल्गारिया के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को दो वाणिज्यिक मालवाहक जहाजों पर हवाई ड्रोन से हमले किए गए। इस हमले के कारण एक व्यापारिक जहाज डूब गया, जबकि दूसरा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद बुल्गारियाई तटरक्षक और आपातकालीन बचाव दलों ने तुरंत बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।
प्राप्त विवरण के अनुसार, बुल्गारिया के क्रापेट्स गांव के तट से लगभग 17 समुद्री मील (करीब 32-34 किलोमीटर) दूर सेंट विंसेंट एंड ग्रेनेडाइंस के ध्वज तले संचालित और तुर्किए की कंपनी से जुड़े मालवाहक जहाज 'अज़ोव कॉनकॉर्ड' को ड्रोन से निशाना बनाया गया। हमले के बाद यह जहाज समुद्र में डूब गया। बचाव दलों ने जहाज से पांच चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया, जबकि 11 नाविक अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। उसी रात दूसरा हमला माल्टीज ध्वज वाले जहाज 'चेल्सी 3' पर हुआ, जिस पर तीन ड्रोन गिरे। इस जहाज पर मौजूद सभी 15 चालक दल के सदस्यों (7 यूक्रेनी और 8 अज़रबैजानी नागरिक) को बचा लिया गया, जिनमें से पांच को मामूली चोटों के लिए चिकित्सा सहायता दी गई।
घटना के बाद बुल्गारिया के प्रधानमंत्री रूमेन राडेव ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई और रूसी राजदूत को तलब किया। बुल्गारियाई सरकार ने कहा कि यद्यपि हमले के जिम्मेदार पक्ष की पुख्ता पुष्टि की जा रही है, परंतु इसका रणनीतिक लाभ रूसी पक्ष के अनुकूल दिखाई देता है। प्रधानमंत्री ने नाटो और यूरोपीय संघ से देश के समुद्री और हवाई क्षेत्र की निगरानी बढ़ाने में सहयोग की मांग की। वहीं, यूक्रेन के विदेश मंत्री और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष ने इसे नागरिक जहाजों और समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताते हुए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। रूस की ओर से इस घटना पर तत्काल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।
यह घटना काला सागर में वाणिज्यिक जहाजरानी मार्गों पर गहराते संकट को दर्शाती है। हाल के दिनों में अनाज और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन में लगे नागरिक जहाजों पर हमलों की घटनाओं से अंतरराष्ट्रीय समुद्री बीमा दरों में तेज बढ़ोतरी और आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने की चिंता बढ़ गई है, जिससे वैश्विक खाद्य व्यापार और नाविकों की सुरक्षा सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।
