कर्नाटक में गन्ने के लाभकारी मूल्य की मांग को लेकर किसानों का चक्का जाम, पुणे-बेंगलुरु समेत प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित

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कर्नाटक में गन्ने के लाभकारी मूल्य की मांग को लेकर किसानों का चक्का जाम, पुणे-बेंगलुरु समेत प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित - AI Featured Image

कर्नाटक में गन्ने के लाभकारी मूल्य की मांग को लेकर किसानों का चक्का जाम, पुणे-बेंगलुरु समेत प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित

कर्नाटक में गन्ने की फसलों के उचित मूल्य और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर किसानों ने 13 अक्टूबर 2026 को राज्य के विभिन्न हिस्सों में व्यापक चक्का जाम आंदोलन शुरू किया। कर्नाटक राज्य रैयत संघ (केआरआरएस) और 'हसीरू सेने' के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन के कारण बेलगावी, धारवाड़, बागलकोट, विजयपुरा, गदग और हावेरी सहित कई जिलों में राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों की आवाजाही ठप हो गई।

प्रदर्शनकारियों ने बेलगावी जिले में हुक्केरी तालुक के हत्तरगी टोल प्लाजा और हिरेबागेवाड़ी टोल प्लाजा पर पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग की दोनों लेन को जाम कर दिया। किसानों ने सड़क पर बैठकर और वाहनों के सामने लेटकर यातायात को पूरी तरह रोक दिया। इसके अलावा धारवाड़ के यरीकोप्पा क्रॉस, बागलकोट के पास रायचूर-सोलापुर राष्ट्रीय राजमार्ग और विजयपुरा के निदगुंडी में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 50 पर भी किसानों ने मार्ग अवरुद्ध कर दिया।

किसानों की प्रमुख मांगों में गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) में वृद्धि, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) को संशोधित कर ₹60 प्रति किलोग्राम करना, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुरूप फसलों का मूल्य तय करना और चीनी मिलों में गन्ने की तौल व रिकवरी आकलन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी चीनी मिलों द्वारा उत्पादित एथेनॉल की पूरी खरीद की व्यवस्था करने की मांग भी कर रहे हैं।

यह आंदोलन नई दिल्ली में किसान प्रतिनिधियों और केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के बीच हुई वार्ता के बेनतीजा समाप्त होने के बाद तेज हुआ है। किसान नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार लंबे समय से उनकी मांगों पर केवल आश्वासन दे रही है और ठोस निर्णय लेने में विफल रही है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

इस राजमार्ग जाम से आम यात्रियों और माल ढुलाई पर गहरा असर पड़ा है। पुणे-बेंगलुरु कॉरिडोर पर भारी व्यावसायिक वाहनों और ट्रकों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। हालांकि आपातकालीन वाहनों और निजी कारों को कई स्थानों पर सर्विस रोड से निकलने दिया गया। स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बल तैनात किए हैं और यातायात को वैकल्पिक मार्गों की ओर मोड़ा है।

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