झारखंड के थानों में सीसीटीवी न लगने और 427 कस्टोडियल मौतों पर हाईकोर्ट सख्त, गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव को अवमानना नोटिस जारी
झारखंड के थानों में सीसीटीवी न लगने और 427 कस्टोडियल मौतों पर हाईकोर्ट सख्त, गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव को अवमानना नोटिस जारी
झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के अदालती आदेशों का पालन न होने और लगातार हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने इस मामले में गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल को कारण बताओ (अवमानना) नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ अदालती अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
अदालत ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत उन आंकड़ों का हवाला दिया, जिनके अनुसार वर्ष 2018 से 2026 के बीच झारखंड में पुलिस व न्यायिक हिरासत (कस्टडी) के दौरान 427 लोगों की मौत दर्ज की गई है। पीठ ने इस आंकड़े पर गहरी चिंता और स्तब्धता व्यक्त करते हुए कहा कि इतने संवेदनशील मामले और लगातार दिए गए न्यायिक निर्देशों के बावजूद थानों में निगरानी तंत्र स्थापित न करना अत्यंत गंभीर लापरवाही है।
उच्च न्यायालय ने इस मामले में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे पर भी असंतोष जताया, जिसमें कहा गया था कि थानों में कैमरे लगाने के स्वतंत्र निर्देश देने का अधिकार डीजीपी के पास नहीं है और इसके लिए गृह विभाग ही सक्षम प्राधिकारी है। अदालत ने टिप्पणी की कि बार-बार निविदा (टेंडर) निकालना, प्रक्रियागत कठिनाइयाँ बताना, निविदा रद्द करना और फिर नए प्रस्ताव की बात करना न्यायिक आदेशों के अनुपालन को टालने या रोकने का एक व्यवस्थित तरीका प्रतीत होता है।
यह मामला सीधे तौर पर आम नागरिकों के मानवाधिकारों और पुलिस व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा है। थानों में चालू हालत में सीसीटीवी कैमरे न होने से हिरासत में उत्पीड़न और संदिग्ध मौतों की निष्पक्ष जांच प्रभावित होती है। अदालत के इस कड़े रुख का उद्देश्य थानों में जवाबदेही सुनिश्चित करना और हिरासत में होने वाली हिंसा व मौतों पर प्रभावी रोक लगाना है।
