बेंगलुरु की अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े विवादित वीडियो के प्रसार पर 42 मीडिया संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर लगाई अंतरिम रोक
बेंगलुरु की अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े विवादित वीडियो के प्रसार पर 42 मीडिया संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर लगाई अंतरिम रोक
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु की एक नगर दीवानी एवं सत्र अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग और मानहानिकारक वीडियो के प्रसारण तथा साझा करने पर अंतरिम रोक (ad-interim ex-parte injunction) लगा दी है। 19वीं अतिरिक्त नगर दीवानी एवं सत्र न्यायालय की न्यायाधीश बी. पुष्पांजलि ने 13 अक्टूबर 2026 को सिद्धारमैया द्वारा दायर मानहानि वाद पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने 42 प्रतिवादियों, जिनमें कई समाचार चैनल, अखबार, यूट्यूब चैनल और प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं, को इन वीडियो, क्लिप, ट्रांसक्रिप्ट अथवा संबंधित सामग्री को किसी भी माध्यम से प्रसारित या वितरित करने से रोक दिया है।
न्यायालय ने यूट्यूब, गूगल, फेसबुक और याहू जैसी प्रौद्योगिकी कंपनियों को भी निर्देश दिया कि वे 27 सितंबर 2026 और 2 अक्टूबर 2026 को अपलोड किए गए इन दो विशिष्ट वीडियो के यूआरएल (URLs) को तुरंत ब्लॉक करें और उपयोगकर्ताओं की उन तक पहुंच बंद करें। अदालत ने माना कि यदि बिना प्रामाणिकता की पुष्टि किए इन वीडियो और सामग्री का प्रसार जारी रहा, तो इससे याचिकाकर्ता की सामाजिक प्रतिष्ठा और निजता को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।
सिद्धारमैया ने अपनी याचिका में वीडियो में लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद, झूठा और मनगढ़ंत करार दिया है। उनका आरोप है कि राजनीतिक कारणों से उनकी छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से एक दुर्भावनापूर्ण अभियान चलाया गया और सनसनीखेज शीर्षकों के जरिए उन्हें एक विवादास्पद आख्यान के केंद्र में पेश करने का प्रयास किया गया। इस कानूनी कदम के साथ ही उन्होंने पुलिस आयुक्त के पास भी शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर अपराध शाखा की साइबर विंग ने सोशल मीडिया पर सामग्री फैलाने वाले खातों और आईपी पतों की जांच शुरू कर दी है। अदालत ने प्रतिवादियों को समन जारी करते हुए मामले की अगली प्रक्रिया तय की है।
