गोवा में भीषण गर्मी और जल संकट की निगरानी के लिए 10 सदस्यीय टास्क फोर्स का गठन
गोवा में भीषण गर्मी और जल संकट की निगरानी के लिए 10 सदस्यीय टास्क फोर्स का गठन
गोवा सरकार ने राज्य में पड़ रही भीषण गर्मी, तापमान में असामान्य वृद्धि और मानसून में कम बारिश के चलते उत्पन्न जल संकट की स्थिति से निपटने के लिए 10 विभागों के प्रमुखों को शामिल करते हुए एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की अध्यक्षता में गठित इस टास्क फोर्स की पहली समीक्षा बैठक गुरुवार, 15 अक्टूबर को आयोजित की गई। जल संसाधन मंत्री सुभाष शिरोडकर ने बैठक के बाद बताया कि यह टास्क फोर्स जलवायु परिवर्तन, अल नीनो प्रभाव और पीने के पानी की उपलब्धता की निगरानी के लिए हर महीने समीक्षा बैठक करेगी।
इस कदम की पृष्ठभूमि राज्य में मौसम का बदलता मिजाज और मॉनसून की कमी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य में अधिकतम तापमान सामान्य से लगभग 5 डिग्री सेल्सियस अधिक यानी 37 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज होने के बाद हीटवेव का 'येलो अलर्ट' जारी किया है। इसके साथ ही, वर्ष 2026 के मानसून सत्र में गोवा में बारिश में करीब 31 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। गिरते भूजल और नदियों के जलस्तर को सुरक्षित रखने के लिए जल संसाधन विभाग ने पहले ही राज्य के 450 से अधिक बांधारों (छोटे बांधों) को समय से पहले बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जल संसाधन मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान योजना के अनुसार राज्य में अगस्त 2027 तक के लिए पर्याप्त कच्चा पानी उपलब्ध है, लेकिन इसके लिए कड़े जल प्रबंधन और अनुशासित उपयोग की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि यदि जल स्तर में गिरावट जारी रही तो आम नागरिकों की पेयजल आपूर्ति को प्राथमिकता देने के लिए राज्य भर में स्विमिंग पूलों के उपयोग पर अस्थाई प्रतिबंध लगाने पर भी विचार किया जा सकता है। इसके अलावा, किसानों को भी फसल बुआई और सिंचाई तय समय-सारिणी के अनुसार करने का निर्देश दिया गया है ताकि पानी की बर्बादी रोकी जा सके।
टास्क फोर्स में शिक्षा विभाग के प्रमुख को भी विशेष रूप से शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि यदि आने वाले दिनों में हीटवेव और तापमान का असर बढ़ता है, तो छात्रों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूलों के समय में बदलाव करने अथवा स्कूलों को बंद करने का त्वरित प्रशासनिक निर्णय लिया जा सके।
