हिमाचल प्रदेश में नए जिलों और प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए आयोग गठित, सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे अध्यक्षता
हिमाचल प्रदेश में नए जिलों और प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए आयोग गठित, सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे अध्यक्षता
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में प्रशासनिक सीमाओं की समीक्षा और नए जिलों, उपमंडलों, तहसीलों व विकास खंडों के पुनर्गठन की संभावनाओं का आकलन करने के लिए एक औपचारिक आयोग का गठन किया है. राज्यपाल की स्वीकृति के बाद 14 अक्टूबर को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई.
इस आयोग की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी को सौंपी गई है. आयोग में अधिवक्ता विशाल पंवार और सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा अधिकारी राजेश शर्मा को बतौर सदस्य शामिल किया गया है. आयोग को संबंधित पक्षों और जनप्रतिनिधियों से विचार-विमर्श कर छह माह के भीतर अपनी विस्तृत सिफारिशें और अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है.
वर्तमान में प्रदेश में 12 राजस्व जिले, 81 उपमंडल, 92 विकास खंड और 193 तहसीलें कार्यरत हैं. राज्य में लंबे समय से कांगड़ा के पालमपुर, नूरपुर, देहरा, शिमला के रामपुर, सोलन के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी और मंडी के सुंदरनगर को नए जिले का दर्जा देने की मांग उठती रही है. हालांकि बद्दी, देहरा और नूरपुर में पहले से पुलिस जिले स्थापित हैं, लेकिन वे पूर्ण राजस्व जिले नहीं हैं.
आयोग आबादी, भौगोलिक विषमताओं, जिला मुख्यालयों से दूरी, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक दक्षता के आधार पर मौजूदा इकाइयों के विलय, विभाजन या नए सृजन की आवश्यकता का मूल्यांकन करेगा. इसके साथ ही सरकारी खजाने पर अत्यधिक वित्तीय भार डाले बिना संसाधनों के सुव्यवस्थित उपयोग के उपाय भी तलाशे जाएंगे. इस प्रक्रिया के पूरा होने से दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों के निवासियों को जिला मुख्यालय स्तर के प्रशासनिक कार्यों के लिए लंबी यात्राओं से राहत मिलने की संभावना है.
