बस्तर के ऐतिहासिक ‘मुरिया दरबार’ में मांझियों और चालकियों के मानदेय में भारी बढ़ोतरी, राज्य सरकार ने जारी किए आदेश
बस्तर के ऐतिहासिक 'मुरिया दरबार' में मांझियों और चालकियों के मानदेय में भारी बढ़ोतरी, राज्य सरकार ने जारी किए आदेश
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के पारंपरिक 'मुरिया दरबार' के दौरान राज्य सरकार ने बस्तर संभाग की पारंपरिक जनजातीय सामाजिक व्यवस्था से जुड़े प्रमुखों के मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि की घोषणा की है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बस्तर के मांझियों और चालकियों के मासिक मानदेय को बढ़ाने का ऐलान किया।
घोषणा के अनुसार, पारंपरिक समाज प्रमुख मांझियों का मासिक मानदेय 2,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 5,000 रुपये (3,000 रुपये की वृद्धि) कर दिया गया है। वहीं, पारंपरिक व्यवस्था में उनके सहयोगी के रूप में कार्य करने वाले चालकियों का मासिक मानदेय 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये प्रति माह (2,000 रुपये की वृद्धि) किया गया है। शासन ने इस फैसले को त्वरित रूप से लागू करते हुए धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मानदेय मद में कुल 38 लाख 52 हजार रुपये के आबंटन और व्यय की प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति भी जारी कर दी है।
बस्तर की सदियों पुरानी सामाजिक व्यवस्था और स्थानीय न्याय प्रणाली में मांझी एवं चालकी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ये प्रतिनिधि ग्रामीण स्तर पर सामाजिक सौहार्द बनाए रखने, पारंपरिक विवादों के निपटारे और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण में धुरी की तरह कार्य करते हैं। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने भी जनजातीय परंपराओं और इस अनूठी लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्व की सराहना की।
दीपावली पर्व से ठीक पहले लिए गए इस निर्णय से बस्तर संभाग के दूरदराज आदिवासी अंचलों में सामाजिक नेतृत्व संभाल रहे प्रतिनिधियों को सीधा आर्थिक संबल मिलेगा। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की उठ रही मांग पूरी होने से स्थानीय जनजातीय समुदायों और पारंपरिक पंचायतों के प्रतिनिधियों में सकारात्मक संदेश गया है।
