वडोदरा नगर निगम की स्थायी समिति ने सांसद यूसुफ पठान को 978 वर्ग मीटर का विवादित भूखंड आवंटित करने के प्रस्ताव को दी मंजूरी
वडोदरा नगर निगम की स्थायी समिति ने सांसद यूसुफ पठान को 978 वर्ग मीटर का विवादित भूखंड आवंटित करने के प्रस्ताव को दी मंजूरी
गुजरात में वडोदरा महानगर पालिका (VMC) की स्थायी समिति ने पूर्व भारतीय क्रिकेटर व लोकसभा सांसद यूसुफ पठान को 978 वर्ग मीटर का नगरपालिका भूखंड आवंटित करने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से अपनी मंजूरी दे दी है। यह भूखंड वडोदरा के तांदलजा क्षेत्र में स्थित टाउन प्लानिंग (टीपी) स्कीम 22 के फाइनल प्लॉट संख्या 90 पर स्थित है, जो यूसुफ पठान के पारिवारिक आवास 'बाग-ए-महमूद' से सटा हुआ है। स्थायी समिति की बैठक में सभी 12 भाजपा पार्षदों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसे अब अंतिम पुष्टि के लिए नगर निगम के जनरल बोर्ड (महासभा) के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
प्रस्ताव के अनुसार, कुल 978 वर्ग मीटर क्षेत्र में से 500 वर्ग मीटर जमीन यूसुफ पठान को आवासीय उद्देश्य के लिए 'उपहार' स्वरूप दी जाएगी, जबकि शेष 478 वर्ग मीटर जमीन वडोदरा शहरी विकास प्राधिकरण (VUDA) की मूल्यांकन समिति द्वारा तय दर के 55 प्रतिशत रियायती मूल्य पर हस्तांतरित की जाएगी। प्रशासनिक आकलन के अनुसार, इस पूरे भूखंड का अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 20.53 करोड़ रुपये है।
इस भूखंड को लेकर विवाद वर्ष 2012 से चला आ रहा था, जब पठान ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इसे 99 साल के पट्टे पर देने का अनुरोध किया था। वर्ष 2014 में राज्य सरकार ने उनके इस अनुरोध को खारिज कर दिया था। इसके बाद जून 2024 में नगर निगम ने भूखंड पर कथित अतिक्रमण को लेकर पठान को नोटिस जारी किया था, जिसके खिलाफ मामला गुजरात उच्च न्यायालय में भी पहुंचा। हालांकि, गुजरात सरकार के शहरी विकास विभाग ने 13 अगस्त को एक नया प्रस्ताव पारित कर इस आवंटन को मंजूरी दी और स्पष्ट किया कि इसे भविष्य में अन्य मामलों के लिए कोई मिसाल (precedent) नहीं माना जाएगा। राज्य सरकार का यह प्रस्ताव नगर निगम को प्राप्त होने के बाद यूसुफ पठान ने 31 अगस्त को उच्च न्यायालय से अपनी याचिका भी वापस ले ली थी।
इस निर्णय पर स्थानीय राजनीति में विवाद खड़ा हो गया है। स्थायी समिति की बैठक के दौरान विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बैठक कक्ष के बाहर तख्तियां लेकर धरना दिया और प्रदर्शन किया। विरोध कर रहे नेताओं का आरोप है कि प्राइम लोकेशन पर स्थित करोड़ों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति को बिना खुली नीलामी के किसी व्यक्ति विशेष को उपहार और भारी छूट पर देना नियमों के खिलाफ और अनुचित है। वहीं नगर निगम प्रशासन का पक्ष है कि यह निर्णय राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों और खेल जगत में संबंधित व्यक्ति के योगदान को ध्यान में रखकर नियमों के तहत लिया गया है।
