हरियाणा में निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों की 45 घंटे की हड़ताल समाप्त, सरकार ने दिया नियामक आयोग के आदेश को चुनौती देने का आश्वासन
हरियाणा में निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों की 45 घंटे की हड़ताल समाप्त, सरकार ने दिया नियामक आयोग के आदेश को चुनौती देने का आश्वासन
हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों और इंजीनियरों द्वारा की जा रही 45 घंटे की हड़ताल को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ हुई मैराथन बैठक के बाद समाप्त कर दिया गया। पंचकूला में देर रात तक चली वार्ता में राज्य सरकार और बिजली कर्मचारी यूनियनों की संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों के बीच सहमति बनी, जिसके बाद कर्मियों ने तुरंत काम पर लौटने और बिजली आपूर्ति बहाल करने की घोषणा की।
यह विवाद हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) द्वारा गुरुग्राम और नूंह क्षेत्रों में बिजली वितरण के लिए एक निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस जारी करने के आदेश के बाद शुरू हुआ था। इसके विरोध में बिजली विभाग के कर्मियों ने 22 अक्टूबर से तीन दिवसीय कार्य बहिष्कार और हड़ताल का आह्वान किया था। कर्मचारियों का तर्क था कि निजी कंपनियों के प्रवेश से सार्वजनिक वितरण प्रणाली कमजोर होगी और कर्मचारियों के सेवा हितों पर असर पड़ेगा।
बैठक के दौरान राज्य सरकार ने कर्मचारी नेताओं को आश्वस्त किया कि विभाग में निजीकरण को लागू नहीं होने दिया जाएगा। सरकार ने बिजली अधिनियम की धारा 108 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए नियामक आयोग के फैसले के खिलाफ कानूनी कदम उठाने और विद्युत अपीलीय अधिकरण (APTEL) सहित उच्चतर कानूनी मंचों पर याचिका दायर करने की प्रतिबद्धता जताई। इसके साथ ही कर्मचारियों के अन्य लंबित मुद्दों पर आगे विचार करने के लिए 3 नवंबर को अगली औपचारिक बैठक तय की गई।
इस हड़ताल के कारण गुरुग्राम, नूंह, रोहतक, रेवाड़ी और फरीदाबाद समेत प्रदेश के कई जिलों में बिजली आपूर्ति गंभीर रूप से बाधित हुई थी। कई रिहायशी कॉलोनियों में लंबे पावर कट की वजह से पेयजल आपूर्ति चरमरा गई थी और औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन ठप होने से उद्योगों को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ा था। समझौता होने के बाद तकनीकी कर्मियों ने फॉल्ट दुरुस्त करने का काम शुरू कर आपूर्ति को सामान्य किया।
