भूटान में ग्लेशियल झील टूटने के बाद उत्तर बंगाल में बाढ़ का अलर्ट, संकोश नदी किनारे से सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए हजारों लोग
भूटान में ग्लेशियल झील टूटने के बाद उत्तर बंगाल में बाढ़ का अलर्ट, संकोश नदी किनारे से सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए हजारों लोग
पड़ोसी देश भूटान के गासा जिले में स्थित शिंताफू (Shintaphu) ग्लेशियल झील के फटने के बाद पश्चिम बंगाल के तराई व डुआर्स क्षेत्रों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। झील का प्राकृतिक ढांचा टूटने के कारण भारी मात्रा में पानी और मलबा नीचे की ओर बहने लगा, जिससे संकोश नदी प्रणाली में जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ने की आशंका बन गई। इसके मद्देनजर अलीपुरद्वार, कूचबिहार और जलपाईगुड़ी सहित उत्तर बंगाल के निचले जिलों में प्रशासन की ओर से हाई अलर्ट जारी किया गया है।
यह घटना गुरुवार रात सामने आई, जब भूटान के सुदूर लाया क्षेत्र में शिंताफू झील से अचानक तेज जलप्रवाह शुरू हुआ। इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल के वन मंत्री और कुमारग्राम के विधायक मनोज कुमार उरांव ने संकोश नदी के तटीय इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को सतर्क करते हुए एहतियातन सुरक्षित स्थानों पर जाने की सार्वजनिक अपील की। विशेषकर अलीपुरद्वार के कुमारग्राम, चांगमारी, पकरीगुड़ी, भोलका और कूचबिहार के तूफानगंज व बक्सीरहाट क्षेत्रों के नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ का सीधा खतरा देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है।
प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राहत एवं बचाव अभियान तुरंत शुरू कर दिया। राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और सिविल डिफेंस की टीमों को संवेदनशील स्थलों पर तैनात किया गया है। स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, नदी के बहाव क्षेत्र में स्थित गांवों से अब तक 5,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालकर स्कूलों और राहत शिविरों में बने शरणस्थलों में स्थानांतरित किया गया है, जहाँ उनके लिए पीने के पानी और भोजन की व्यवस्था की गई है।
केंद्रीय जल आयोग के निगरानी केंद्रों को लगातार संकोश नदी के जलस्तर पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। वन विभाग ने यह चिंता भी जताई है कि नदी का पानी यदि समीपवर्ती वनीय इलाकों में घुसता है तो हाथियों सहित अन्य जंगली जानवर रिहायशी बस्तियों की ओर पलायन कर सकते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना बन सकती है। हालांकि प्रशासन ने बताया है कि पानी के बहाव की गति में थोड़ा सुधार देखा गया है, लेकिन किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए तटवर्ती निवासियों को नदियों के पाट से दूर रहने और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
