बिहार में विदा होते मॉनसून के बीच 18 जिलों में बारिश, तेज हवाओं और वज्रपात को लेकर ‘येलो अलर्ट’ जारी
बिहार में विदा होते मॉनसून के बीच 18 जिलों में बारिश, तेज हवाओं और वज्रपात को लेकर 'येलो अलर्ट' जारी
**मौसम का हाल और चेतावनी**
बिहार में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी के अंतिम चरण के दौरान मौसम में अचानक बदलाव देखा गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के 18 जिलों में मेघगर्जन, वज्रपात और तेज हवाओं की संभावना को देखते हुए 'येलो अलर्ट' जारी किया है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, वातावरण में नमी के प्रभाव और स्थानीय वायुमंडलीय परिस्थितियों के संयोजन से राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश की स्थिति बनी है।
**प्रभावित जिले और हवा की रफ्तार**
मौसम विभाग की चेतावनी के दायरे में उत्तर-पश्चिमी, उत्तर-मध्य और दक्षिण-पश्चिमी बिहार के जिले शामिल हैं। जिन 18 प्रमुख जिलों के लिए येलो अलर्ट प्रभावी किया गया है, उनमें गोपालगंज, सीवान, सारण, भोजपुर, बक्सर, अरवल, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, वैशाली, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण शामिल हैं।
इन इलाकों में बादलों की गड़गड़ाहट और आकाशीय बिजली चमकने के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। इसके अतिरिक्त, उत्तर और पूर्वी बिहार के सीमांचल क्षेत्र के जिलों—जैसे पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, सुपौल, मधेपुरा और सहरसा में भी हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान व्यक्त किया गया है।
**मौसमी पृष्ठभूमि और मॉनसून की विदाई**
राज्य से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की क्रमिक विदाई जारी है। मॉनसून वापसी की सीमा रेखा राज्य के सुपौल क्षेत्र से होकर आगे बढ़ रही है। हालांकि, मॉनसून के लौटने के बावजूद बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और स्थानीय परिसंचरण तंत्र के कारण आसमान में घने बादल छा रहे हैं और रुक-रुक कर बौछारें पड़ रही हैं। पटना तथा इसके नजदीकी क्षेत्रों में भी आंशिक रूप से बादल छाए रहने और वातावरण में उमस व नमी की स्थिति दर्ज की गई है।
**आम जनजीवन और कृषि पर असर**
अचानक बदले इस मौसम से अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट आने की संभावना है, जिससे सुबह और शाम के समय हल्की ठंडक का अहसास शुरू हो सकता है। दूसरी ओर, खरीफ फसलों की कटाई और रबी की बुआई की तैयारी में जुटे किसानों के लिए आंधी और वज्रपात जोखिम पैदा कर सकते हैं। ग्रामीण इलाकों में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं को लेकर विशेष चिंता व्यक्त की गई है, क्योंकि खेतों में खुले में काम करने वाले लोगों पर इसका सीधा खतरा रहता है।
**सुरक्षा दिशा-निर्देश और पाठकों के लिए सुझाव**
मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन से जुड़े दिशा-निर्देशों के अनुसार नागरिकों को निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है:
1. गरज-चमक या तेज हवाएं चलने के दौरान खुले मैदानों, जलस्रोतों और खेतों में जाने से बचें।
2. वज्रपात के समय ऊंचे पेड़ों, धातु की संरचनाओं और बिजली के खंभों के नीचे बिल्कुल भी शरण न लें।
3. खराब मौसम की स्थिति में पक्के मकानों या सुरक्षित इमारतों के भीतर रहें और बिजली के उपकरणों के उपयोग में एहतियात बरतें।
4. किसान खेतों में जलभराव से बचाव और कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर ढककर रखने के उपाय करें।
**आगे का पूर्वानुमान**
मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों में मौसमी गतिविधियों में कमी आने और परिस्थितियां सामान्य होने की संभावना है। मॉनसून के पूरी तरह विदा होने के साथ ही राज्य में शुष्क पछुआ हवाओं का प्रवाह बढ़ेगा, जिससे आगामी दिनों में तापमान में क्रमिक गिरावट और मौसम के साफ रहने की उम्मीद है।
