उत्तर प्रदेश के डेयरी क्षेत्र में 695.18 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव, 2,500 से अधिक रोजगार सृजित होने की उम्मीद

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उत्तर प्रदेश के डेयरी क्षेत्र में 695.18 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव, 2,500 से अधिक रोजगार सृजित होने की उम्मीद - AI Featured Image

उत्तर प्रदेश के डेयरी क्षेत्र में 695.18 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव, 2,500 से अधिक रोजगार सृजित होने की उम्मीद

**निवेश प्रस्तावों और आयोजन का विवरण**

उत्तर प्रदेश सरकार के दुग्ध विकास विभाग को राज्य में डेयरी इकाइयां स्थापित करने और प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने के लिए 22 कंपनियों से 695.18 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। यह घोषणा हाल ही में संपन्न हुए उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS 2026) के दौरान निवेशकों और उद्यमियों के साथ हुई विस्तृत वार्ताओं के बाद आधिकारिक तौर पर की गई। ये सभी प्रस्ताव 'उत्तर प्रदेश दुग्ध विकास एवं दुग्ध उत्पाद संवर्धन नीति 2022' के तहत दिए गए हैं।

**प्रमुख कंपनियां और जिलों में निवेश की योजना**

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सबसे बड़ा प्रस्ताव ऐस इंटरनेशनल लिमिटेड (Ace International Limited) की ओर से प्राप्त हुआ है, जिसने हाथरस, अलीगढ़ और आगरा में अपनी परियोजनाएं स्थापित करने के लिए 457 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। इसके अलावा, केयरब्रो इनोवेटर्स (Carebro Innovators) ने चार जिलों में 100 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है।

अन्य प्रमुख प्रस्तावों में मुरादाबाद और रामपुर में संयंत्र स्थापित करने के लिए अंजुम डेयरी द्वारा 50 करोड़ रुपये, गौरी फूड एंड बेवरेजेस द्वारा 14.65 करोड़ रुपये तथा झांसी और लखनऊ में इकाइयों के लिए के. डेयरी फार्म द्वारा 12 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं। इन 22 प्रस्तावों का विस्तार राज्य के विभिन्न जिलों जैसे मुरादाबाद, अमरोहा, रामपुर, एटा, फिरोजाबाद, इटावा, झांसी, लखनऊ, हाथरस, अलीगढ़ और आगरा तक है।

**आधिकारिक बयान और नीतिगत उद्देश्य**

उत्तर प्रदेश की दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. के अनुसार, ट्रेड शो के दौरान उद्यमियों, निवेशकों और दुग्ध उत्पादकों के साथ परियोजनाओं के तकनीकी पहलुओं, संभावित निवेश और उपयुक्त स्थानों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग प्राप्त प्रस्तावों का लागू नियमों और विभागीय नीतियों के अनुरूप परीक्षण करेगा ताकि परियोजनाओं का सुचारु क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। राज्य सरकार की इस नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य में डेयरी प्रसंस्करण संयंत्र, वाणिज्यिक डेयरी फार्म, कोल्ड-चेन अवसंरचना, माइक्रो-डेयरी और बायोगैस संयंत्रों की स्थापना को गति देना है।

**रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव**

दुग्ध विकास विभाग के अनुमान के मुताबिक, इन प्रस्तावित परियोजनाओं से उत्तर प्रदेश में प्रत्यक्ष रूप से 2,500 से अधिक औपचारिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे। अकेले ऐस इंटरनेशनल की 457 करोड़ रुपये की परियोजना से लगभग 1,500 लोगों को काम मिलने की उम्मीद है, जबकि केयरब्रो इनोवेटर्स की परियोजनाओं से 250 से अधिक रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इसके साथ ही ढुलाई, शीत भंडारण (कोल्ड स्टोरेज) और ग्रामीण आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े क्षेत्रों में भी सहायक आजीविका के साधन विकसित होंगे।

**पशुपालकों और किसानों के लिए लाभ**

इस निवेश से संगठित खरीद नेटवर्क और आधुनिक प्रसंस्करण केंद्रों का विस्तार होगा। इससे स्थानीय दुग्ध उत्पादकों और छोटे किसानों को अपने दूध की बिक्री के लिए एक संगठित बाजार मिलेगा, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और उन्हें समय पर उचित मूल्य मिल सकेगा। इसके अतिरिक्त, पनीर, दही, घी और अन्य मूल्यवर्धित दुग्ध उत्पादों के प्रसंस्करण को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।

**आगे की प्रक्रिया**

विभाग अब प्राप्त प्रस्तावों के लिए भूमि, आवश्यक अनुमतियों, वित्तीय व्यवस्था और तकनीकी आवश्यकताओं की समीक्षा करेगा। स्वीकृतियों के चरणबद्ध पूरा होने के बाद संयंत्रों के निर्माण और संचालन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिससे राज्य के डेयरी मूल्य श्रृंखला को खेत से लेकर बाजार तक मजबूती मिलेगी।

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