उत्तर प्रदेश में 1.70 लाख से अधिक गैर-शिक्षण कर्मचारियों को मिलेगा ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज, कैबिनेट ने दी मंजूरी
उत्तर प्रदेश में 1.70 लाख से अधिक गैर-शिक्षण कर्मचारियों को मिलेगा ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज, कैबिनेट ने दी मंजूरी
उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग से जुड़े गैर-शिक्षण (शिक्षणेतर) कर्मचारियों तथा उनके आश्रित परिजनों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लखनऊ में संपन्न हुई राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक में इस कल्याणकारी योजना पर मुहर लगाई गई। इस फैसले की जानकारी प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना द्वारा दी गई।
इस योजना के तहत प्रदेश के कुल 1,70,366 गैर-शिक्षण कर्मचारियों और उनके आश्रित परिजनों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिलेगी। योजना के दायरे में अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय, वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय, अशासकीय सहायता प्राप्त एवं वित्तविहीन संस्कृत विद्यालय/महाविद्यालय और बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन आने वाले विद्यालयों तथा समग्र शिक्षा परियोजना के कर्मचारी शामिल हैं। इसके अंतर्गत माध्यमिक शिक्षा विभाग के 48,062 कर्मचारियों के प्रीमियम के रूप में राज्य सरकार 14.41 करोड़ रुपये तथा बेसिक शिक्षा विभाग के 1,22,304 कर्मचारियों के लिए शेष राशि वहन करेगी। सरकार प्रति कर्मचारी लगभग 3,000 रुपये वार्षिक प्रीमियम के आधार पर प्रतिवर्ष लगभग 51.11 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
इस फैसले से पहले सरकार द्वारा शिक्षकों को यह सुविधा देने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसके बाद गैर-शिक्षण कर्मचारियों की ओर से भी इसे लागू करने की लंबे समय से मांग की जा रही थी। नई व्यवस्था के तहत पात्र कर्मचारियों और उनके परिवारों को सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ संबद्ध निजी चिकित्सालयों में गंभीर बीमारियों व आपातकालीन स्थितियों में बिना अपनी जेब से भुगतान किए 5 लाख रुपये तक के उपचार का लाभ मिल सकेगा। इससे निम्न और मध्यम आय वर्ग के कर्मचारियों को चिकित्सा खर्च के वित्तीय बोझ से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
