उत्तर प्रदेश के डेयरी क्षेत्र में 695 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव, 2,500 से अधिक युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर
उत्तर प्रदेश के डेयरी क्षेत्र में 695 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव, 2,500 से अधिक युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर
**व्यापार मेले में डेयरी क्षेत्र को मिला भारी निवेश**
उत्तर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और प्रसंस्करण से जुड़े बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 22 निजी एवं सहकारी कंपनियों की ओर से कुल ₹695.18 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। हाल ही में आयोजित 'उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026' (UPITS) के चौथे संस्करण के दौरान राज्य के दुग्ध विकास विभाग को ये औपचारिक प्रस्ताव सौंपे गए। इन परियोजनाओं के ज़मीनी स्तर पर लागू होने से प्रदेश के विभिन्न जिलों में 2,500 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है।
**प्रमुख कंपनियाँ और लक्षित ज़िले**
प्राप्त प्रस्तावों में सबसे बड़ा निवेश 'ऐस इंटरनेशनल लिमिटेड' की तरफ से प्रस्तावित है। यह कंपनी हाथरस, अलीगढ़ और आगरा ज़िलों में अपनी प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित करने के लिए लगभग ₹457 करोड़ का निवेश करेगी, जिससे अकेले लगभग 1,500 युवाओं के लिए रोजगार पैदा होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, 'केयरब्रो इनोवेटर्स प्राइवेट लिमिटेड' ने अयोध्या, लखनऊ, मेरठ और बरेली में परियोजनाओं के लिए ₹100 करोड़ का प्रस्ताव दिया है, जिससे 250 से अधिक लोगों को काम मिलने की उम्मीद है।
अन्य प्रस्तावों में 'अंजुम डेयरी' द्वारा मुरादाबाद, अमरोहा और रामपुर के लिए ₹50 करोड़, 'ग्विन व्हे प्रोटीन' द्वारा एटा, फिरोजाबाद और इटावा के लिए ₹27 करोड़, 'गौरी फूड एंड बेवरेजेस' द्वारा झांसी के लिए ₹14.65 करोड़ तथा 'के. डेयरी फार्म' द्वारा झांसी और लखनऊ क्षेत्र के लिए ₹12 करोड़ का निवेश शामिल है।
**आधिकारिक बयान और विभागीय कार्यप्रणाली**
दुग्ध विकास विभाग के अनुसार, व्यापार मेले में विभाग का प्रदर्शनी स्थल उद्यमियों, दुग्ध उत्पादकों और पशुपालकों के लिए प्रमुख केंद्र रहा। राज्य की दुग्ध आयुक्त ने स्पष्ट किया कि मेले के दौरान निवेशकों के साथ तकनीकी आवश्यकताओं, संभावित संयंत्र स्थलों और सरकारी प्रोत्साहनों पर विस्तृत चर्चा की गई। विभाग को प्राप्त सभी निवेश प्रस्तावों का उत्तर प्रदेश दुग्ध विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 के तहत विधिवत तकनीकी व प्रशासनिक परीक्षण किया जाएगा, जिसके उपरांत संयंत्र स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
**ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर प्रभाव**
इन नई इकाइयों की स्थापना से केवल औद्योगिक रोजगार ही नहीं बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों पशुपालकों और दूध उत्पादक किसानों को भी सीधा लाभ मिलेगा। आधुनिक चिलिंग प्लांट, प्रसंस्करण इकाइयाँ और वैल्यू एडिशन (मूल्य संवर्धन) संयंत्र स्थापित होने से दूध का सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित होगा और किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य समय पर मिल सकेगा। इससे स्थानीय स्तर पर दूध की बर्बादी रुकेगी तथा पनीर, व्हे प्रोटीन और पैकेज्ड डेयरी उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी।
**आगे की प्रक्रिया एवं हितधारकों के लिए जानकारी**
विभाग अब इन सभी 22 प्रस्तावों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और भूमि आवंटन की आवश्यकताओं की समीक्षा करेगा। स्वीकृत इकाइयों को राज्य सरकार की नीति के तहत निर्धारित अनुदान, पूँजीगत सहायता और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। डेयरी क्षेत्र में नया उद्यम लगाने या अपनी मौजूदा इकाइयों का विस्तार करने के इच्छुक स्थानीय किसान, स्वयं सहायता समूह और युवा उद्यमी भी राज्य के दुग्ध विकास विभाग के संबंधित ज़िला कार्यालयों से संपर्क कर विभागीय योजनाओं और वित्तीय सहायता का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
