यूरोपीय संघ ने रूस के सैन्य-औद्योगिक तंत्र पर लगाया अब तक का सबसे बड़ा प्रतिबंध; 1,569 कंपनियों और शीर्ष अधिकारियों को किया ब्लैकलिस्ट
यूरोपीय संघ ने रूस के सैन्य-औद्योगिक तंत्र पर लगाया अब तक का सबसे बड़ा प्रतिबंध; 1,569 कंपनियों और शीर्ष अधिकारियों को किया ब्लैकलिस्ट
यूरोपीय संघ (EU) ने 12 अक्टूबर 2026 को रूस के सैन्य और औद्योगिक क्षेत्र के खिलाफ प्रतिबंधों का अब तक का सबसे बड़ा पैकेज स्वीकृत किया। इस नए फैसले के तहत रूसी रक्षा उद्योग से जुड़ी 826 कंपनियों और इन कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के रूप में कार्यरत 743 व्यक्तियों सहित कुल 1,569 संस्थाओं व लोगों को प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया है। यूरोपीय संघ का यह कदम यूक्रेन के नागरिक बुनियादी ढांचे पर जारी हमलों और संघर्ष के बढ़ते दायरे के जवाब में उठाया गया है।
प्रतिबंधों के इस नए दायरे में रूस के रक्षा विनिर्माण तंत्र के उन मध्यम स्तर के आपूर्तिकर्ताओं को लक्षित किया गया है, जो मिसाइलों, मानव रहित हवाई वाहनों (ड्रोन) और सैन्य विमानों के लिए अहम पुर्जे तैयार करते हैं। इनमें सेमीकंडक्टर, माइक्रो-सर्किट, कंप्यूटर सिस्टम, रडार, एंटेना, संचार उपकरण, विस्फोटक और नेविगेशन ऑप्टिक्स बनाने वाली इकाइयां शामिल हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन लक्षित कंपनियों का वार्षिक कारोबार कम से कम 20 अरब यूरो है और इनमें लगभग 2,50,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं।
लागू किए गए प्रतिबंधों के तहत सूचीबद्ध कंपनियों और अधिकारियों की यूरोपीय संघ क्षेत्र में मौजूद सभी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया है। इसके साथ ही यूरोपीय संघ के किसी भी नागरिक या वित्तीय संस्थान द्वारा इन्हें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से फंड या आर्थिक संसाधन मुहैया कराने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। संबंधित व्यक्तियों पर यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में प्रवेश करने पर यात्रा प्रतिबंध भी लगाया गया है। इस नए पैकेज के लागू होने के साथ ही यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े प्रतिबंध ढांचे के तहत कुल सूचीबद्ध संस्थाओं और लोगों की संख्या बढ़कर करीब 4,600 हो गई है। इसके अतिरिक्त, कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों में रूसी स्टेट ड्यूमा चुनावों के आयोजन में शामिल रहे 77 अन्य व्यक्तियों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं।
इस कड़े कदम का उद्देश्य रूस की सैन्य आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करना और हथियारों के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली उन्नत तकनीकों तक उसकी पहुंच को सीमित करना है। वैश्विक स्तर पर काम कर रही बहुराष्ट्रीय कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और व्यापारिक संगठनों को अब इन नई संस्थाओं के साथ लेन-देन की गहन जांच करनी होगी, जिससे आपूर्ति तंत्र और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अनुपालन प्रक्रियाओं पर सीधा असर पड़ेगा।
