बिहार में मृत जन्म की रोकथाम के लिए पोर्टल आधारित निगरानी प्रणाली की शुरुआत, अब हर मामले का होगा डिजिटल रिकॉर्ड
बिहार में मृत जन्म की रोकथाम के लिए पोर्टल आधारित निगरानी प्रणाली की शुरुआत, अब हर मामले का होगा डिजिटल रिकॉर्ड
क्या है मामला और नवीनतम कदम
बिहार में प्रसव पूर्व और प्रसव के दौरान नवजात बच्चों की मृत्यु (मृत जन्म या स्टिलबर्थ) को रोकने और इसके कारणों की सटीक पहचान करने के लिए एक नई डिजिटल ट्रैकिंग एवं निगरानी प्रणाली लागू की जा रही है। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने केंद्र सरकार के 'स्टिलबर्थ सर्विलांस एंड रिस्पांस' दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी स्वास्थ्य केंद्रों में पोर्टल आधारित रिपोर्टिंग शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके तहत अब राज्य के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मृत जन्म के प्रत्येक मामले को 24 घंटे के भीतर पोर्टल पर दर्ज करना और सात दिनों के भीतर उसका विस्तृत दस्तावेजीकरण पूरा करना अनिवार्य किया गया है।
कार्यशाला और प्रशासनिक दिशा-निर्देश
इस नई निगरानी व्यवस्था को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए पटना में दो दिवसीय क्षेत्रीय प्रशिक्षण एवं समीक्षा कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में लगभग 60 चिकित्सा अधिकारियों, मेडिकल कॉलेजों के संकाय सदस्यों, कार्यक्रम प्रबंधकों और जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यशाला के दौरान स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने स्पष्ट किया कि मृत जन्मों की केवल संख्या गिनने के बजाय इसके रोके जा सकने वाले चिकित्सीय व प्रबंधकीय कारणों को समझना सबसे जरूरी है। वहीं केंद्रीय स्तर के स्वास्थ्य अधिकारियों ने रेखांकित किया कि इस समीक्षा प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य किसी स्वास्थ्यकर्मी पर दोष मढ़ना नहीं, बल्कि व्यवस्थागत कमियों को दूर कर स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत बनाना है।
तकनीकी व्यवस्था और तय मानक
नई प्रणाली के तहत सारा डेटा 'मैटरनल, पेरिनेटल एंड चाइल्ड डेथ सर्विलांस एंड रिस्पांस' (MPCDSR) पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा। निर्धारित चिकित्सकीय दिशा-निर्देशों के अनुसार, 28 सप्ताह या उससे अधिक के गर्भकाल के बाद बिना किसी जीवन लक्षण के जन्म लेने वाले नवजात को मृत जन्म के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। यदि गर्भकाल की अवधि की जानकारी उपलब्ध न हो, तो 1,000 ग्राम या उससे अधिक वजन अथवा 35 सेंटीमीटर या उससे अधिक शारीरिक लंबाई को इसका मानक माना जाता है। पोर्टल पर दर्ज विवरण में मां का स्वास्थ्य इतिहास, प्रसव के दौरान की जटिलताएं और रेफरल से जुड़ी जानकारियां शामिल रहेंगी।
आधिकारिक आंकड़े और पृष्ठभूमि
बिहार सरकार के सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) के स्टिलबर्थ डैशबोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, 2021 से अब तक राज्य में कुल 94,759 मृत जन्म के मामले आधिकारिक तौर पर दर्ज किए गए हैं, जिनमें 52,000 से अधिक पुरुष और 42,000 से अधिक महिला नवजात शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में वर्ष 2022 में 8,045, वर्ष 2023 में 11,159, वर्ष 2024 में 9,500, वर्ष 2025 में 63,850 और 2026 में अब तक 1,659 मामले दर्ज किए गए हैं। जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, विभिन्न सर्वे और स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणालियों में अलग-अलग दरें सामने आने के कारण वास्तविक कारणों की निगरानी में बाधा आ रही थी। इस पहल का दीर्घकालिक लक्ष्य वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के अनुरूप मृत जन्म दर को एकल अंक (सिंगल डिजिट) में लाना है।
आम लोगों पर प्रभाव और आगे की प्रक्रिया
इस डिजिटल निगरानी का सीधा लाभ गर्भवती महिलाओं और नवजातों को मिलेगा। अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जटिल गर्भधारण की पहचान समय रहते हो सकेगी, जिससे उच्च जोखिम वाले मामलों को समय पर बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, ब्लॉक और जिला स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और स्टाफ नर्सों को प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि प्रसव पूर्व जांच (ANC) और संस्थागत प्रसव के दौरान हाइपरटेंशन, खून की कमी या अन्य जटिलताओं पर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।
