न्यूयॉर्क सिटी में सेंट्रल पार्क की घोड़ा-गाड़ियों पर प्रतिबंध की तैयारी, 2028 तक पूरी तरह बंद करने पर सहमति
न्यूयॉर्क सिटी में सेंट्रल पार्क की घोड़ा-गाड़ियों पर प्रतिबंध की तैयारी, 2028 तक पूरी तरह बंद करने पर सहमति
न्यूयॉर्क शहर के सेंट्रल पार्क में 150 से अधिक वर्षों से चल रही पारंपरिक घोड़ा-गाड़ियों (हॉर्स-कैरिज) को पूरी तरह समाप्त करने के लिए नगर प्रशासन और सिटी काउंसिल के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी और सिटी काउंसिल की स्पीकर जूली मेनिन ने इस प्रतिबंध का समर्थन करते हुए घोषणा की कि घोड़ा-गाड़ियों के संचालन को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने वाले विधेयक ‘रोमांच्स लॉ’ (Romanch's Law) पर 22 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो इसके तहत नए लाइसेंस जारी करने पर तत्काल रोक लग जाएगी और 1 जून 2028 तक शहर से घोड़ा-गाड़ी उद्योग को पूरी तरह गैरकानूनी घोषित कर दिया जाएगा।
इस कड़े कदम की पृष्ठभूमि में सेंट्रल पार्क में लंबे समय से चली आ रही सुरक्षा चिंताएं और हाल ही में हुई एक दुखद दुर्घटना है। जून के महीने में सेंट्रल पार्क में एक बेकाबू घोड़ा-गाड़ी से गिरकर 18 वर्षीय पर्यटक रोमांच महाजन की मौत हो गई थी, जिसके बाद इस उद्योग को बंद करने की मांग तेजी से उठी। इसके अलावा, पशु कल्याण कार्यकर्ताओं ने लगातार व्यस्त शहरी सड़कों पर अत्यधिक गर्मी, प्रदूषण और भीड़ के बीच घोड़ों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए थे, जहां हाल के वर्षों में कई घोड़ों के सड़क पर गिरने व मरने के मामले भी सामने आए थे। स्पीकर जूली मेनिन ने स्पष्ट किया कि सेंट्रल पार्क में पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों की भारी भीड़ के बीच यह उद्योग अब सार्वजनिक सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम बन चुका है।
इस फैसले का सीधा असर घोड़ा-गाड़ी चालकों, पर्यटकों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। विधेयक में प्रावधान किया गया है कि प्रशासन इस उद्योग से जुड़े चालकों और कामगारों की आजीविका की सुरक्षा के लिए एक व्यापक परिवर्तन योजना बनाएगा, जिससे उन्हें नए आर्थिक अवसर और रोजगार प्रदान किए जा सकें, साथ ही घोड़ों के सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी। वहीं दूसरी ओर, घोड़ा-गाड़ी चालकों का प्रतिनिधित्व करने वाली ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन और उद्योग के संचालकों ने इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए इसे न्यूयॉर्क की ऐतिहासिक पहचान और श्रमिकों की आजीविका पर आघात बताया है तथा इसके खिलाफ संघर्ष करने की बात कही है।
