मेरठ में पति की हत्या कर सांप से मौत का नाटक रचने वाली पत्नी और उसके प्रेमी को अदालत ने सुनाई फांसी की सजा
मेरठ में पति की हत्या कर सांप से मौत का नाटक रचने वाली पत्नी और उसके प्रेमी को अदालत ने सुनाई फांसी की सजा
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले की एक सत्र अदालत ने पति की गला दबाकर हत्या करने और मामले को सांप के काटने से हुई दुर्घटना साबित करने की साजिश रचने के मामले में मृतक की पत्नी और उसके प्रेमी को मृत्युदंड (फांसी की सजा) सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर की अदालत ने इस जघन्य अपराध को 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (रेयरेस्ट ऑफ रेयर) श्रेणी का मानते हुए दोनों दोषियों को यह कठोर सजा दी।
यह मामला मेरठ जिले के बहसूमा थाना क्षेत्र अंतर्गत अकबरपुर सादात गांव का है। मृतक की पहचान अमित कश्यप उर्फ मिक्की के रूप में हुई थी, जो टाइल्स और पत्थर लगाने का कार्य करता था। दोषी अमरदीप भी अमित के साथ ही काम करता था और उसका अमित के घर आना-जाना था। इसी दौरान अमरदीप और अमित की पत्नी रविता के बीच अवैध संबंध स्थापित हो गए। जब अमित को इन संबंधों की जानकारी हुई और उसने इसका कड़ा विरोध किया, तो दोनों आरोपियों ने मिलकर उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची।
जांच और अदालती सुनवाई में यह तथ्य साबित हुआ कि दोनों आरोपियों ने एक सपेरे से 1,000 रुपये में जहरीला सांप खरीदा था। अप्रैल 2025 में एक रात जब अमित सो गया, तब रविता और अमरदीप ने मिलकर उसका गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद अपराध को छुपाने और इसे सांप के काटने से हुई प्राकृतिक या आकस्मिक मौत दिखाने के लिए उन्होंने बिस्तर पर शव के पास वही जिंदा सांप छोड़ दिया। सुबह शव के पास सांप मिलने के कारण शुरुआत में परिजनों व ग्रामीणों ने इसे सर्पदंश से हुई मृत्यु माना।
मामले की जांच के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश हुआ। पोस्टमार्टम में मृतक के गले और नाक पर चोट व गला घोंटे जाने (एस्फिक्सिया/दम घुटने) से मौत होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद पुलिस ने हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में मामला दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। प्रदेश के 'ऑपरेशन कन्विक्शन' के तहत त्वरित सुनवाई और पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई। इस फैसले ने समाज में कड़े न्याय का संदेश दिया है कि साक्ष्यों को छिपाने की सुनियोजित साजिशों के बावजूद वैज्ञानिक जांच और कानून के दायरे से अपराधी बच नहीं सकते।
