मध्य प्रदेश में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के मामले में राज्य सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की एसएलपी
मध्य प्रदेश में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के मामले में राज्य सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की एसएलपी
मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है। राज्य सरकार ने जबलपुर हाईकोर्ट के 9 अक्टूबर के फैसले को चुनौती देते हुए देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की है। यह याचिका महाधिवक्ता कार्यालय के माध्यम से 'स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश बनाम आशिता दुबे एवं अन्य' प्रकरण में दायर की गई है।
इस कानूनी कदम से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास 'समत्व भवन' में ओबीसी महासभा के प्रतिनिधिमंडलों से विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग के संवैधानिक अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश का बिंदुवार कानूनी अध्ययन करने के बाद ही सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष मजबूती से पक्ष रखने के निर्देश दिए गए थे, ताकि भर्ती प्रक्रियाओं में रोके गए 13 प्रतिशत पदों समेत पूरे आरक्षण ढांचे पर न्यायसंगत समाधान निकाला जा सके।
यह विवाद लंबे समय से प्रदेश में सरकारी भर्तियों और शैक्षणिक प्रवेश प्रक्रियाओं से जुड़ा रहा है। पूर्व में 27 प्रतिशत आरक्षण पर विवाद के चलते 87-13 प्रतिशत के फॉर्मूले के तहत भर्तियां की जा रही थीं, जिसमें 13 प्रतिशत पद कानूनी निर्णय के अधीन होल्ड पर रखे गए थे। हाईकोर्ट के हालिया आदेश के बाद इस व्यवस्था को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई थी। सरकार के इस कदम से राज्यभर के लाखों प्रतियोगी परीक्षार्थियों और अभ्यर्थियों के चयन परिणामों तथा भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।
