मनोज जरांगे की कथित ऑडियो क्लिप पर महाराष्ट्र सरकार ने दिए फॉरेंसिक जांच के आदेश, महायुति में सियासी तकरार तेज

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मनोज जरांगे की कथित ऑडियो क्लिप पर महाराष्ट्र सरकार ने दिए फॉरेंसिक जांच के आदेश, महायुति में सियासी तकरार तेज - AI Featured Image

मनोज जरांगे की कथित ऑडियो क्लिप पर महाराष्ट्र सरकार ने दिए फॉरेंसिक जांच के आदेश, महायुति में सियासी तकरार तेज

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल द्वारा जारी एक कथित ऑडियो क्लिप को लेकर राज्य के सियासी गलियारों और सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में विवाद गहरा गया है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में घोषणा की कि सार्वजनिक हुई ऑडियो क्लिप की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी, जिससे बातचीत की प्रामाणिकता और इसकी असलियत सामने आ सके।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब मनोज जरांगे पाटिल ने जालना में एक ऑडियो क्लिप जारी की। इस क्लिप में कथित तौर पर यह दावा किया गया था कि आरक्षण आंदोलन को दबाने के लिए शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के माध्यम से जरांगे तक 500 करोड़ रुपये पहुंचाने की बात कही गई थी। जरांगे ने आरोप लगाया कि उनके आंदोलन को कमजोर करने और उनकी छवि खराब करने के लिए साजिश रची जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने इस प्रकरण की निष्पक्ष विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मांग रखी, जबकि उन्होंने किसी भी प्रकार की धनराशि लेने के दावे को पूरी तरह खारिज किया।

ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद महायुति गठबंधन के भीतर खींचतान तेज हो गई। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के वरिष्ठ नेता रामदास कदम ने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि भाजपा के कुछ अंदरूनी नेता मनोज जरांगे के साथ मिलकर एकनाथ शिंदे को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुँचाने की साजिश कर रहे हैं। कदम ने कहा कि यह बातचीत पुरानी है और इसे अब सामने लाने के पीछे शिंदे की साख को ठेस पहुँचाने की मंशा हो सकती है। वहीं, भाजपा नेताओं ने ऑडियो की सत्यता पर सवाल उठाते हुए सहयोगी दल द्वारा लगाए गए साजिश के आरोपों का कड़ा विरोध किया और संयम बरतने की बात कही।

नागपुर विधान परिषद स्नातक सीट चुनाव में मतदान के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना के प्रतिनिधिमंडल और भाजपा, दोनों पक्षों ने उनसे मिलकर जांच की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि लगभग ढाई साल पुरानी बताई जा रही यह बातचीत अब क्यों सार्वजनिक की गई और इसके पीछे किसका क्या हित है। आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय से जुड़े इस घटनाक्रम ने राज्य के प्रशासनिक व राजनीतिक माहौल में अनिश्चितता और तनाव को बढ़ा दिया है।

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