हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त, सरकार ने निजी वितरण लाइसेंस रद्द कराने का दिया आश्वासन
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त, सरकार ने निजी वितरण लाइसेंस रद्द कराने का दिया आश्वासन
हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण के विरोध में चल रही राज्यव्यापी बिजली कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त हो गई है। पंचकूला में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ कर्मचारी संगठनों की उच्चस्तरीय वार्ता में सहमति बनने के बाद कर्मचारियों ने आंदोलन वापस ले लिया और तुरंत कार्य पर लौटने का ऐलान किया।
बैठक में 'हरियाणा पावर एम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी' के प्रतिनिधियों के साथ-साथ मुख्य सचिव और ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। बैठक के दौरान सरकार ने कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि राज्य में बिजली सेवाओं का निजीकरण नहीं होने दिया जाएगा। इस विवाद के समाधान के लिए सरकार ने विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 के तहत हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) को निर्देश जारी कर निजी कंपनी को दिए गए समानांतर लाइसेंस की समीक्षा और उसे रद्द कराने की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है।
यह विवाद तब गहराया जब नियामक आयोग की ओर से गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए एक निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस देने की मंजूरी दी गई थी। इसके विरोध में प्रदेश भर के लगभग 40 हजार बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं ने तीन दिवसीय हड़ताल शुरू की थी। कर्मचारी संगठनों का कहना था कि इस फैसले से सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियों को बड़ा नुकसान पहुंचेगा और अंततः किसानों तथा आम उपभोक्ताओं पर इसका विपरीत असर पड़ेगा।
इस हड़ताल के कारण गुरुग्राम, पंचकूला, सोनीपत और रोहतक सहित कई जिलों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिससे कई औद्योगिक क्षेत्रों में कामकाज पर असर पड़ा और आम लोगों को बिजली-पानी की किल्लत का सामना करना पड़ा था। हड़ताल वापस लिए जाने के बाद तकनीकी कर्मचारियों ने फील्ड में लौटकर आपूर्ति बहाल करने का कार्य शुरू कर दिया है, जिससे जनजीवन सामान्य हो रहा है। मामले की औपचारिक प्रगति और अन्य सेवा संबंधी मांगों पर चर्चा के लिए सरकार और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच नवंबर की शुरुआत में पुनः बैठक निर्धारित की गई है।
