अमेरिकी न्याय विभाग ने अलास्का सीनेट चुनाव नतीजों के प्रमाणीकरण पर रोक लगाने के लिए अदालत में दायर की याचिका
अमेरिकी न्याय विभाग ने अलास्का सीनेट चुनाव नतीजों के प्रमाणीकरण पर रोक लगाने के लिए अदालत में दायर की याचिका
अमेरिका के न्याय विभाग ने अलास्का के आगामी यूएस सीनेट चुनाव को लेकर यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट फॉर द डिस्ट्रिक्ट ऑफ अलास्का में एक मुकदमा दायर किया है। इस मुकदमे में मांग की गई है कि यदि रिपब्लिकन पार्टी के मौजूदा सीनेटर डैन सुलिवन अपनी डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी मैरी पेल्टोला से चुनाव हारते हैं, तो नतीजों के आधिकारिक प्रमाणीकरण (सर्टिफिकेशन) को रोका जाए।
मुकदमे का मुख्य आधार मतपत्र पर एक ही नाम वाले दो उम्मीदवारों की मौजूदगी से मतदाताओं के बीच संभावित भ्रम को बताया गया है। इस चुनाव में रिपब्लिकन सीनेटर डैन एस. सुलिवन के साथ-साथ पीटर्सबर्ग के एक सेवानिवृत्त स्कूल शिक्षक डेनियल जे. सुलिवन जूनियर भी उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं। न्याय विभाग और रिपब्लिकन पक्ष का तर्क है कि दोनों उम्मीदवारों के समान उपनाम और मिलते-जुलते नाम के कारण मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे मौजूदा सीनेटर के वोटों में सेंध लग सकती है। याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि यदि सीनेटर सुलिवन की हार का अंतर दूसरे सुलिवन को मिले मतों से कम रहता है, तो परिणामों के प्रमाणीकरण पर तब तक रोक लगाई जाए जब तक कि मतदाताओं की मंशा की जांच न हो जाए।
इस मामले में अलास्का राज्य, अलास्का चुनाव प्रभाग की निदेशक कैरल बीचर और राज्य चुनाव बोर्ड को प्रतिवादी बनाया गया है। पूर्व में राज्य स्तर पर डेनियल जे. सुलिवन की उम्मीदवारी को चुनौती दी गई थी, लेकिन अलास्का के सुप्रीम कोर्ट ने उनकी उम्मीदवारी को वैध ठहराते हुए मतपत्र पर उनका नाम रखने की अनुमति दे दी थी।
इस कानूनी कदम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पत्रकारों से बातचीत में पुष्टि की कि उन्होंने न्याय विभाग को यह मुकदमा दायर करने के निर्देश दिए थे। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार मैरी पेल्टोला ने इस मुकदमे को चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप और जनता का ध्यान मूल मुद्दों से भटकाने का प्रयास बताया है। अलास्का की दूसरी रिपब्लिकन सीनेटर लीसा मुर्कोव्स्की ने भी इस मुकदमे पर असहमति जताते हुए कहा कि मतपत्र पर मौजूदा सीनेटर की पहचान पहले से ही स्पष्ट रूप से अंकित है और मतदाताओं को भ्रमित मानना अनुचित है। कानूनी विशेषज्ञों ने चुनाव से ठीक पहले संघीय स्तर से इस प्रकार के हस्तक्षेप को असाधारण बताया है।
