उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में राकांपा प्रतिनिधिमंडल ने सीएम देवेंद्र फडणवीस से की मुलाकात, वित्त विभाग वापस सौंपने की मांग की
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में राकांपा प्रतिनिधिमंडल ने सीएम देवेंद्र फडणवीस से की मुलाकात, वित्त विभाग वापस सौंपने की मांग की
महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर वित्त मंत्रालय के आवंटन को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। रविवार को राज्य की उपमुख्यमंत्री एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई स्थित मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास 'वर्षा' पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। इस बैठक में राकांपा नेताओं ने औपचारिक रूप से मांग की कि गठबंधन के पूर्व समझौते के तहत वित्त विभाग पार्टी को वापस सौंपा जाए।
मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस महत्वपूर्ण बैठक से पहले सुनेत्रा पवार के आधिकारिक आवास 'देवगिरि' पर पार्टी की कोर कमेटी की बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ नेता एवं कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल, सांसद सुनील तटकरे, धनंजय मुंडे, हसन मुश्रीफ और जय पवार शामिल थे। बैठक के पश्चात छगन भुजबल ने पत्रकारों को जानकारी दी कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने पार्टी की मांग पर सकारात्मक रुख दिखाया है। उन्होंने बताया कि राज्य में वर्तमान में सूखा राहत और वित्तीय आवश्यकताओं के प्रबंधन के मद्देनजर औपचारिकताएं पूरी होने के बाद राज्य विधानमंडल के आगामी शीतकालीन सत्र से पहले वित्त विभाग सुनेत्रा पवार को सौंपे जाने की संभावना है। इसके साथ ही उन्होंने मंत्रिमंडल में व्यापक फेरबदल या किसी अन्य राजनीतिक विलय की अटकलों को निराधार बताया।
पृष्ठभूमि के अनुसार, महायुति सरकार के गठन के समय हुए सत्ता-साझेदारी फॉर्मूले के तहत वित्त विभाग राकांपा को आवंटित किया गया था और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार इस विभाग का प्रभार संभाल रहे थे। उनके निधन के पश्चात यह प्रभार मुख्यमंत्री फडणवीस ने अतिरिक्त तौर पर अपने पास रख लिया था। राकांपा के विधायकों और पदाधिकारियों का पक्ष रहा है कि काफी समय बीत जाने के बाद अब मूल सहमति के अनुरूप यह प्रभार पार्टी की प्रमुख सुनेत्रा पवार को दिया जाना चाहिए।
प्रशासनिक दृष्टिकोण से वित्त विभाग राज्य के बजटीय आवंटन, विकास परियोजनाओं की मंजूरी और निर्वाचन क्षेत्रों के लिए धनराशि जारी करने का प्रमुख केंद्र होता है। इस पोर्टफोलियो के भविष्य को लेकर स्पष्टता आने से राज्य में सूखा राहत उपायों, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं के वित्तीय क्रियान्वयन में गति आने की संभावना है।
