उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के नतीजे घोषित, भाजपा ने जीतीं 6 और सपा ने 5 सीटें; वाराणसी-लखनऊ में सपा की जीत से बढ़ी सियासी हलचल
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के नतीजे घोषित, भाजपा ने जीतीं 6 और सपा ने 5 सीटें; वाराणसी-लखनऊ में सपा की जीत से बढ़ी सियासी हलचल
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (एमएलसी) की 11 सीटों (5 स्नातक और 6 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र) के लिए हुए द्विवार्षिक चुनाव के परिणाम 29 अक्टूबर 2026 को घोषित कर दिए गए। 23 अक्टूबर को हुए मतदान के बाद 27 अक्टूबर से मतपत्रों की गिनती शुरू हुई थी, जो लंबी प्रक्रिया के बाद गुरुवार को पूरी हुई। घोषित नतीजों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने 5 सीटों पर विजय हासिल की।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के अंतर्गत मेरठ स्नातक सीट पर भाजपा के दिनेश कुमार गोयल और आगरा स्नातक सीट पर भाजपा के डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह विजयी रहे। वहीं, इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर सपा के डॉ. मान सिंह यादव, वाराणसी स्नातक सीट पर सपा के आशुतोष सिन्हा और लखनऊ स्नातक सीट पर सपा प्रत्याशी कांति सिंह ने जीत हासिल की। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा के उमेश द्विवेदी ने लखनऊ, श्रीचंद शर्मा ने मेरठ, हरि सिंह ढिल्लों ने बरेली-मुरादाबाद और ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर जीत दर्ज की। दूसरी ओर, वाराणसी शिक्षक सीट पर सपा के लाल बिहारी यादव और आगरा-अलीगढ़ शिक्षक सीट पर सपा के आकाश अग्रवाल ने जीत दर्ज की।
इन नतीजों के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने परिणामों को 'डबल इंजन सरकार की डबल हार' करार दिया और दावा किया कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और राजधानी लखनऊ में सपा की जीत 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए बदलाव का संकेत है। वहीं, उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा ने अपनी सीटें बरकरार रखी हैं और पार्टी 2027 के विधानसभा चुनावों में भारी बहुमत के साथ सत्ता में तीसरी बार वापसी करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी विजयी प्रत्याशियों को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि वे शिक्षकों और स्नातकों के हितों व राज्य की प्रगति में सकारात्मक योगदान देंगे।
